Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

शेर की कहानी | बंदर की कहानी

बहुत समय पहले की बात है, एक जंगल में एक शेर रहता था। वह शेर बहुत ही शक्तिशाली और अकेला था। वह अपने जंगल का राजा माना जाता था और सभी जानवर उसके सामने डर के मारे रहते थे।

Hindi Kahani | Hindi Kahaniya शेर की कहानी | बंदर की कहानी

एक दिन, शेर ने एक बंदर को देखा जो एक पेड़ पर बैठा हुआ था। शेर की आँखों में एक चमक सी आई जब उसने बंदर को देखा। शेर ने तुरंत उस बंदर की ओर बढ़ा और बोला, “तू मेरे जंगल में क्या कर रहा है?”

शेर की कहानी | बंदर की कहानी

बंदर ने डर के साथ कहा, “मुझे यहाँ खोजना था क्योंकि मेरे पेड़ों में खाने की कमी हो रही है।”

शेर ने हंसते हुए कहा, “तू मेरे साम्राज्य में आकर मुझसे मिलने की कयास क्यों लगा रहा है? मैं तेरे लिए खाना ढूंढ़ सकता हूँ, लेकिन उसके बदले में तू मेरे सेवाक बन जाएगा।”

बंदर ने सोचा और फिर शेर के साथ रहने का समझौता किया। शेर ने उसे खाना खिलाया और उसे अपने साम्राज्य में स्वागत किया।

धीरे-धीरे, बंदर ने शेर के साथ अच्छी दोस्ती कर ली और उसने शेर की सहायता करना शुरू किया। शेर ने भी उसे बहुत कुछ सिखाया और उसका मार्गदर्शन किया।

एक दिन, जंगल में एक बड़ा समस्या आ गई जिसने सभी जानवरों को खतरे में डाल दिया। शेर ने बंदर से कहा, “अब हमें मिलकर इस समस्या का समाधान निकालना होगा।”

शेर और बंदर ने मिलकर मिलकर समस्या का समाधान निकाला और जंगल को फिर से सुकून मिला। इसके बाद, शेर ने बंदर को अपना साथी माना और उसके साथ जंगल का संरक्षण करने का कार्य संभाला।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि सहायता और सहयोग से ही सब कुछ संभव है, और दो अलग-अलग प्रजातियों के बीच में भी अगर मिलजुलकर काम किया जाए तो हम सभी मिलकर एक समृद्धि और शांति भरे जंगल की रचना कर सकते हैं।

खरगोश और कछुआ की कहानी| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

यह कहानी है पंचतंत्र की, जिसमें एक घमंडी खरगोश और एक धैर्यवान कछुआ के बीच में हुआ एक दौड़ का मुकाबला। जंगल का माहौल हर कदम पर चुनौती देने वाला था, लेकिन खरगोश को अपनी तेज गति पर गर्व था।

खरगोश और कछुआ की कहानी| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

एक दिन, खरगोश ने अपनी तेज दौड़ में एक कछुए से कहा, “अरे कछुए, तू मेरे सामने कभी भी दौड़ में हार नहीं सकता। मैं इतना तेज़ हूँ कि तू मेरी पहुंच को नहीं पकड़ सकता।”

कछुआ ने मुस्कराते हुए कहा, “तेरी तेज़ दौड़ मुझे डरा नहीं सकती, क्योंकि वास्तविक दौड़ में जीत उसकी होती है, जो मेहनत और स्थिरता के साथ दौड़ता है।”

खरगोश और कछुआ की कहानी| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

खरगोश ने अभिमान से कहा, “तुझे मेरी तेज़ी का मालूम भी नहीं है! आज ही हम एक दौड़ में भाग लेते हैं, और फिर देखेंगे कौन जीतता है।”

खरगोश और कछुआ ने तय किया कि दौड़ एक बड़े पेड़ के चारों ओर होगी। दौड़ के लिए सभी जंगली जानवर एकत्र हो गए।

दौड़ की शुरुआत हुई, और खरगोश ने अपनी तेज गति से अग्रसर हासिल की। वह बहुत ही उड़ता हुआ महसूस कर रहा था और लोगों को हेरान करने के लिए हँसता था।

वहीं, कछुआ धीरे-धीरे और स्थिरता से अपने मकसद की दिशा में बढ़ रहा था। खरगोश ने अपनी तेज गति के बजाय आराम करना शुरू किया और फिर एक अचानकी टेढ़े मोड़ पर वह हार गया।

कछुआ ने दौड़ में जीत हासिल की। सभी जंगली जानवर ने उसे बधाई दी और उसकी स्थिरता को सराहा। खरगोश ने खुद को हार मानने का बाद, उसे गर्व और आत्म-समीक्षा की आवश्यकता महसूस हुई।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि घमंड से कुछ नहीं होता, बल्कि मेहनत और धैर्य से ही सफलता मिलती है। धीरे-धीरे चलने वाला कछुआ ने तेज खरगोश को हराया, क्योंकि उसने मेहनत और स्थिरता की महत्वपूर्णता को समझा था।

जंगल में बाढ़| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

यह कहानी सुंदरबन नाम के जंगल की है। यहां बंदर, भालू, चूहा, हाथी चारों अच्छे दोस्त होते हैं। शेर खान जंगल का राजा होता है, पर वह बहुत घमंडी होता है और उसकी चापलूसी हर समय लोमड़ी करती है। शेरखान जंगल के विकास के लिए कुछ नहीं करता। जंगल में बारिश के दिनों में बाढ़ आने की संभावना होती है, पर शेर खान इस बारे में कुछ भी नहीं सोचता। यह देखकर एक दिन।

जंगल में बाढ़| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

भालू भालू देखो ना। बारिश का मौसम आने वाला है। पर शेरखान ने अभी तक बारिश के पानी को निकालने के लिए कुछ नहीं किया।

बंदर भाई तुम ठीक कह रहे हो, पर हम कर भी क्या सकते हैं? शेर खान के आगे हमारी कहां चलती है? वह किसी की कहां सुनते हैं?

दोनों इसी विषय पर बात कर रहे होते हैं। तभी दोनों के दोस्त चूहा और हाथी वहां आ जाते हैं।

अरे दोस्त, तुम दोनों इतनी सुबह सुबह आखिर कहां चल दिए। हम दोनों शेर खान के पास जा रहे हैं। तुम दोनों भी हमारे साथ चलो। शेरखान के पास ऐसी क्या बात करनी है तुम्हें? मुझे तो उसके पास जाने में बहुत डर लगता है।

आबिद डरता क्यों है? हक की बात करने से कभी भी डरना नहीं चाहिए। और फिर भी अगर डर लगता है ना तो चूड़ियां पहन ले तो।

अब चूड़ियां पहनने की बात मत कर। ठीक है डीके, मैं चलता हूं तेरे साथ।

सबकी बात सुनकर चूहे से रुका नहीं जाता है और वह उछलकर हाथी के ऊपर बैठ जाता है। फिर कहता है अरे।

दोस्त वह क्या है? डर के आगे जीत होती है, इसीलिए आपको भी चलेगा। और हां, हाथी ने जंगल में एक न्यूज सुनी है। इस बार बारिश अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ने वाली है। इसलिए हमें शेर खान के पास चलकर यह बात बतानी ही चाहिए।

हां, वैसे तो शेरखान कभी किसी की कुछ नहीं सुनता, पर अगर बात इतनी गंभीर हो तो उसे बताना हमारा फर्ज है।

शेरखान सिर्फ लोमड़ी की ही बात सुनता है। मुझे तो शक है कहीं शेरखान का लोमड़ी से टांका तो नहीं भिड़ गया?

हम चारों एक काम करते हैं। क्यों न हम शेरखान की छमिया लोमड़ी को अपने वश में कर ले? क्योंकि शेरखान उसकी हर बात सुनता है।

यह बात उन तीनों को ठीक लगती है। उसके बाद चारों लोमड़ी के पास जाते हैं।

कैसी हो लोमड़ी बहन? क्या हाल है तुम्हारे हैं।

मेरा हाल जानने नहीं आए हो। जरूर कोई बात करनी होगी। लोमड़ी की बातें सुनकर चारों लोग एक दूसरे का मुंह देखने लगते हैं। इतने में वहां शेरखान आ जाता है और उन सबको देखकर बोलता है।

क्या बात है? तुम चारों यहां क्या कर रहे हो? शेरखान वह दरअसल बात कुछ ऐसी है कि।

ऐसा कहकर भालू हकलाने लगता है। तभी हाथी कहता है।

वह बात यह।

है कि कल मैंने जंगल न्यूज में बारिश और बाढ़ के बारे में सुना। अगर आपने बारिश को रोकने के लिए कुछ भी नहीं।

किया तो हमारा जंगल।

भी पानी में डूब जाएगा।

हाथी की बात सुनकर शेरखान गुस्से में कहता है।

मुझे मेरा काम सिखाने की कोई जरूरत नहीं। चलो जाओ यहां से।

शेरखान की बात सुनकर लोमड़ी चापलूसी करते हुए कहती है। शेरखान मैंने चारों को कहा था कि शेरखान को अपने काम के बारे में सब पता है। उनको कुछ बताने की जरुरत नहीं है। यह सुनकर चारों दोस्त उदास मन से वहां से चले जाते हैं। कुछ ही दिनों में बारिश का मौसम आ जाता है और एक दिन बहुत बारिश होने लगती है और कई दिनों तक बारिश रुकती नहीं है। यह देखकर बंदर हे भगवान!

अब क्या होगा? मेरे घर में तो चारों तरफ से पानी आना शुरू भी हो गया है। अब मुझे कहीं और जाकर रहना होगा।

बंदर उछलकर बाहर आ जाता है और हाथी के घर में चला जाता है। वह देखता है कि वहां पर पहले से भालू और चूहा मौजूद होते हैं।

यह देखकर अरे तुम सब लोग भी यहीं पर हो।

क्या करें? हमारे घरों में पानी भर गया है और यह सब हमारे शेरखान की वजह से हुआ है।

भालू की बात सुनकर।

मेरे बिल में भी पानी भर गया है। मैं भी डूबते डूबते बचा हूं। और भाई बंदर, तुम्हारे घर में क्या हुआ है? तुम सबको तो पता ही है कि मैं पेड़ पर रहता हूं और बारिश से बचने के लिए ही मैंने पेड़ के ऊपर घर बनाया था और वह भी बारिश से टूट गया। इसीलिए मुझे हाथी के घर की याद आई।

चारों यही बातें कर रहे होते हैं कि इतने में हाथी के घर में भी पानी भर जाता है। यह सब देखकर।

दोस्तों।

तुम सब चिंता मत करो, मैं कुछ करता हूं।

यह कहकर हाथी बहुत सारे पेड़ों को अपने खून से तोड़कर अपने घर में रख देता है और उसके ऊपर सारे दोस्त खड़े हो जाते हैं। दूसरी तरफ लोमड़ी के घर में पानी घुस जाता है। पानी को देखकर लोमड़ी। अरे मेरे पूरे घर में पानी घुस गया है। अब मैं कहां जाऊं? कोई मुझे सहारा दो। तभी लोमड़ी को शेरखान की याद आती है और वह शेर खान के घर की तरफ तैरते हुए चली जाती है। वहां जाकर वह देखती है कि राजा शेर खान भी पानी में तैर ही रहे हैं। यह देखकर अरे यहां तो शेर खान भी पानी में तैर रहे हैं।

मुझे कहीं और जाकर अपनी जान बचानी चाहिए। पर कहां जाऊं? लोमड़ी थोड़ी देर कुछ सोचती है और कहती है अरे ये चारों तो अभी तक शेर खान के पास मदद मांगने नहीं आए। लगता है चारों पानी से बचे हुए हैं। मुझे देखना चाहिए। लोमड़ी हाथी के घर की तरफ तैरती हुई चली जाती है। वह देखती है कि हाथी के घर में बहुत सारे पेड़ हैं और उन पेड़ों के ऊपर चारों पानी से बचकर बैठे हुए हैं। यह देखकर भाई आप लोग मुझे भी बचा लो।

क्या मैं आपके घर में आ सकती हूं? कोई जरूरत नहीं है। चले जाओ, जाओ अपने शेर के पास। दोस्त ऐसा नहीं कहते। अगर कोई मुसीबत में मदद मांगता है तो उसकी मदद करनी चाहिए।

हाथी लोमड़ी को अपने घर में बुला लेता है। वह सब पानी से बचकर उन ऊंचे पेड़ों पर बैठे हुए होते हैं और दूसरी तरफ शेर खान पानी में डूब रहा होता है और अपने आप से कहता है।

कहां जाऊं मैं? अभी तक मदद के लिए मेरे पास कोई भी जानवर नहीं आया। एक बार चलकर देखता हूं, शायद कोई मेरी मदद कर दे।

शेर खान तैरते हुए पानी से कुछ दूर जाता है और कुछ देर बाद हाथी का घर सामने देखकर उसके घर में चला जाता है और सबको वहां देखकर।

भाई हाथी क्या तुम्हारे जंगल के राजा को यहां पर रहने की जगह मिल सकती है? मुझे भी बचा लो इस बाढ़ से।

शेर खान हमारे हाथी भाई का दिल बहुत बड़ा है। वह आपको भी।

अपने घर में जगह देंगे।

शेर खान यह सब आपकी ही वजह से हुआ है। अगर आपने हमारी बात मान ली होती और जंगल में बाढ़ के पानी को निकालने के लिए आपने कोई प्रबंध किया होता तो आज हम सभी को यह दिन नहीं देखना पड़ता।

चूहे की बात सुनकर।

दोस्त चूहा अभी यह सब बात करने का समय नहीं है। अभी हमें अपने जंगल के राजा को सुरक्षित करने के बारे में सोचना चाहिए और यह हमारा फर्ज है। उसके बाद सारे दोस्त शेर खान को अंदर बुला लेते हैं। थोड़ी देर में बारिश और भी तेज हो जाती है और बाढ़ और भी बढ़ने लगती है। पेड़ों की ऊंचाई की वजह से पानी हाथी के घर के अंदर घुस नहीं पाता है जिसकी वजह से उन सबकी जान बच जाती है। कुछ दिनों बाद बारिश रुक जाती है और वह सारे बाहर निकलकर देखते हैं तो सारा जंगल बाढ़ की वजह से बर्बाद हो चुका होता है।

यह देखकर यह सब मेरी वजह से हुआ है। अगर मैंने बाढ़ के पानी को निकालने के लिए कोई योजना बनाई होती तो शायद ऐसा कभी नहीं होता। अब सब लोग मुझे माफ कर दीजिए। एक राजा होने के बावजूद भी मैंने अपनी प्रजा की समस्याओं को नहीं समझा।

शेर खान की बात सुनकर लोमड़ी ने कहा, शेर खान आप ठीक कह रहे हैं। आज इन चारों दोस्तों की वजह से ही हम बच पाए हैं। अगर यह हमें अपने घर में नहीं रुकने देते तो हम दोनों इस बाढ़ में डूब चुके होते। मुझे भी माफ कर दो।

शेर खान और लोमड़ी अब दोनों को ही अपनी गलती का एहसास हो गया है। यही बहुत बड़ी बात है। पर अब हमें कुछ ऐसा करना चाहिए कि दुबारा कभी जंगल में बाढ़ आने की नौबत ही न आए।

उसके बाद से शेर खान जंगल से पानी को निकालने की व्यवस्था करता है और आने वाले सालों में कभी भी जंगल में बारिश की वजह से बाढ़ की समस्या नहीं होती है और सारे जानवर खुशी खुशी रहने लगते हैं।

चालाक बूढ़ा शेर| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

शेर सिंह अब बूढ़ा हो चुका था। वह चाहता था कि उसके जीते जी वह किसी ज्ञानी को जंगल का राजा बना दे। इसलिए शेर सिंह ने जंगल के सभी प्राणियों को अपने दरबार में बुलाया। देखो भाइयो।

चालाक बूढ़ा शेर| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

अब मैं बूढ़ा हो चुका हूं और राजा का कर्तव्य निभाने में असमर्थ हूं। इसीलिए मैं चाहता हूं कि राजगद्दी किसी ज्ञानी के हाथ में सौंप देना चाहिए। इसलिए जो भी राजा बनना चाहता है, उसे बल और बुद्धि की परीक्षा देनी होगी। जो भी प्राणी मेरी परीक्षा में पास होगा वही इस जंगल का राजा बनेगा। शेर सिंह का संदेश जंगल में आग की तरह फैल जाता है। जंगल की हर गली मुहल्ले में सारे प्राणी यही बात कर रहे होते हैं। बंदर भाई, बंदर भाई, आप राजा बन जाइए ना। अब चतुर भी हैं और शक्तिशाली भी हैं।

हां, वह तो ठीक है, मगर मैं राजा बनने के लायक नहीं हूं। जंगल का राजा तो शेर ही होता है। शेर सिंह को अपने बेटे को ही राजा बनाना चाहिए। हां, मगर शेर सिंह चाहते हैं कि जो कसौटी पर खरा उतरेगा, वही जंगल का राजा बनेगा। भाई शेर सिंह तो बड़ा ही अकलमंद राजा है। अरे मैं तो उनके इम्तिहान में पास ही नहीं हो सकता। दूसरी ओर शेरनी के मुंह बोले भाई लोमड़ी को भी राजा बनने की इच्छा हुई। इसलिए वह शेरनी के पास जाकर कहता है।

दीदी, क्या तुमने सुना कि जीजा जी राजगद्दी छोड़ने वाले हैं? हां, मैंने सुना तो दीदी। क्या मैं राजा बनने के लायक नहीं हूं? तुम राजा बनने के लायक हो, मगर तुम्हें शेर सिंह के इम्तहान में पास होना पड़ेगा। क्या तुम इसके लिए तैयार हो? लोमड़ी के हां कहते ही शेरनी लोमड़ी को लेकर शेर खान के पास पहुंच जाती है। लोमड़ी के साथ शेरनी को देखकर शेर सिंह बोला। महारानी, तुम इस वक्त यहां।

हां महाराज, मैं अपने मुंहबोले भाई को लेकर आपके पास किसी मकसद से आई हूं। हां हां। शेरनी। बताओ तुम यहां साले साहब को लेकर क्यों आई हो? मैं चाहती हूं आप इसे राजा बना दीजिए। यह नहीं हो सकता। मगर क्यों? लोमड़ी क्यों राजा नहीं बन सकता?

क्योंकि यह प्राणी राज्य परिवार से ताल्लुक नहीं रखता। महाराज, यह तो गलत बात हो गई। अगर नेता का बेटा ही नेता बनेगा तो हममें और इंसानों में क्या फर्क रह जाएगा? आपने ही तो कहा था जीजा जी कि जो ज्ञानी होगा उसे आप राजा बनाएंगे तो क्या मैं ज्ञानी नहीं हूं? मैंने यह भी कहा था कि जो बल और बुद्धि के परीक्षा में पास होगा वही अगला राजा होगा।

महाराज, याद कीजिए वह दिन जिस दिन आप को शिकारियों ने बंधक बना लिया था और उस दिन मैंने ही आपकी जान बचाई थी और उस दिन आपने मुझे वचन दिया था। तुमने मेरी जान बचाई है। मांगो, तुम्हें क्या चाहिए? महाराज अभी मुझे कुछ नहीं चाहिए। देना है तो आप मुझे वचन दीजिए कि वक्त आने पर जो मैं मांगूंगी, आप मुझे देंगी, मैं वचन देता हूं वक्त आने पर तुम जो मांगूंगी, वह मैं तुम्हें दूंगा। अगर आपको अपना वचन याद है तो वादा निभाइए और मेरे मुंह बोले भाई को राजा बनाइए।

ठीक है, तुम्हारे कहने पर मैं इसे राजा बनाने को तैयार हूं, मगर इसे मेरी परीक्षा में पास होना होगा। मैं कोई भी परीक्षा देने के लिए तैयार हूं जीजा जी। ठीक उसी वक्त नदी के उस पार से गोलियां चलने की आवाजें आती हैं। ठीक है लोमड़ी तो बताओ यह किसकी आवाज है? यह तो बड़ा ही आसान सवाल है। मैं अभी पता लगा कर आता हूं। लोमड़ी दौड़ता हुआ नदी की ओर जाता है। है और कुछ ही देर में वापस आकर कहता है महराज।

नदी के उस पार कुछ शिकारी लोग खड़े हैं और वह बंदूक से गोली चलाकर शिकार करने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। ठीक है तो पता करो वहां कितने शिकारी हैं। राजा बनने के लिए थोड़ी मेहनत तो करनी पड़ेगी ना। मैं अभी पता लगाकर आता हूं जीजा जी।

शिकारियों की गिनती करने के लिए लोमड़ी दौड़ता हुआ नदी के किनारे की ओर जाता है और कुछ ही देर में लोमड़ी वापस आकर शेर सिंह से कहता है। महराज वह 12 लोग हैं। अच्छा तो वह 12 शिकारी हैं, मगर उनके हाथ में कितनी बंदूकें हैं, वह बताओ। बंदूकें तो मैंने नहीं गिनी। अभी मैं गिनकर आता हूं।

एक बार फिर लोमड़ी बंदूकों की गिनती करने के लिए नदी की ओर दौड़ता है और कुछ ही देर में लोमड़ी बंदूकों की गिनती करके वापस आता है और फिर शेर सिंह से कहता है। महराज! सबके हाथ में बंदूकें हैं। मेरा मतलब है कि उनके पास 12 बंदूकें हैं, तो आप पता लगाओ कि वो लोग कहां से आए हैं। जाओ।

महाराज की आज्ञा पाकर लोमड़ी दौड़ती हुई नदी की ओर जाता है। हे भगवान! शेर सिंह ने तो दौड़ा दौड़ा कर मेरी छुट्टी कर दी। कहीं ये शिकारी लोग मुझे गोली मार दें। मुझे डर लग रहा है। पर क्या करूं? फटती है। फिर भी मुझे जाना तो पड़ेगा ना। आखिर राजा बनना है। फिर कुछ ही देर में शेर सिंह के सामने आकर लोमड़ी कहता है। महराज वह पूर्व दिशा से आए हैं और वो कहां जा रहे हैं ये पता किया या नहीं। शेर सिंह के सवाल से परेशान होकर लोमड़ी रोते हुए बोला। दीदी ये मुझे राजा नहीं बनाना चाहते हैं।

इसलिए देखो न जीजा जी मुझसे कैसे कैसे ऊट पटांग सवाल करके मेरी फिरकी ले रहे हैं। रोओ मत मेरे भाई। मैं अभी इनकी खबर लेती हूं। क्यों जी, इसे राजा नहीं बनाना है। इसीलिए आप ऐसे ऊटपटांग प्रश्न कर रहे हैं। आप ऐसा क्यों कर रहे हो? ठीक उसी वक्त शेर सिंह का बेटा शमशेर सिंह वहां पर आ जाता है। उसे देखकर भालू कहता है। महराज, सबको मौका मिलना चाहिए। हम सभी जानवर चाहते हैं कि कि एक मौका युवराज को भी देना चाहिए। हां हां राजन युवराज को भी अपनी क्षमता दिखाने का मौका मिलना चाहिए।

देखो साथियों, मैं चाहता हूं कि जंगल का राजा वीर, ज्ञानी और पराक्रमी होना चाहिए। इसलिए युवराज अगर राजा बनना चाहते हैं तो उन्हें भी इम्तिहान देना पड़ेगा। क्या वो इम्तिहान देने के लिए तैयार है? हां, मैं तैयार हूं पापा। युवराज की हां कहते ही जंगल के सभी प्राणी खुश हो जाते हैं। तभी नदी की ओर से गोलियों की आवाजें आती हैं।

ठीक है युवराज, क्या तुम्हें ये आवाजें सुनाई दे रहीं हैं? अगर राजा बनना है तो पता लगाओ कि वो आवाजें किसकी हैं। जो आज्ञा पिता जी। शेरसिंह की आज्ञा का पालन करते हुए युवराज शमशेर सिंह आवाज की दिशा में नदी के किनारे की ओर चल पड़ते हैं। मगर काफी देर होने के बाद भी युवराज वापस नहीं लौटते हैं। ये देखकर लोमड़ी ने खट्टे मन से कहा।

माफ करना महराज। इतना समय बीत गया मगर युवराज अब तक नहीं लौटे। इतनी देर में तो मैं 10 बार जाकर वापस लौटा था। थोड़ा सब्र करो लोमड़ी, युवराज ज़रूर वापस आएंगे और अगर वो वापस नहीं आए तो मैं ही राजा बनूंगा। वो वापस नहीं आए तो मैं ही राजा बनूंगा। ठीक उसी वक्त युवराज शमशेर सिंह वापस आते हैं। महाराज की जय हो महाराज।

नदी के उस पार 12 शिकारी अपनी अपनी 12 बंदूकें हाथ में लेकर शिकार करने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। सारे शिकारी पूर्व की ओर से आए हैं और आज रात वो हमारे जंगल में शिकार करने के लिए आने वाले थे। मगर मैंने अपनी जान पर खेलकर उन्हें गुमराह करके दूसरे जंगल छोड़ आया। क्या तुमने अपनी जान की परवाह भी नहीं की? युवराज नहीं। जैसे ही शिकारियों ने मुझे देखा वो मेरे पीछे पड़ गए।

बंदूक से उन्होंने मेरे ऊपर कई फायर किए। मगर उस वक्त शिकारियों से अपनी जान बचाना मेरा मकसद नहीं था। इस जंगल को बचाना मेरा कर्तव्य था। इसलिए मैं अपनी जान पर खेलकर सारे शिकारियों को दूसरे जंगल में छोड़ आया और इसी चक्कर में मुझे यहां आने में थोड़ी सी देर हो गई।

ये सुनकर लोमड़ी का सिर शर्म से झुक गया। महराज बगल में छोरा और गांव में ढिंढोरा युवराज शमशेर सिंह ही राजा बनने के योग्य हैं। क्यों भाइयो। वो युवराज को ही राजा बनाएगी। महाराज महारानी, मैं चाहता तो बिना इम्तिहान लिए ही युवराज को राजा घोषित कर सकता था।

चालाक बूढ़ा शेर| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

वो इस काबिल है कि नहीं यह जानना मेरा कर्तव्य है। इसलिए मैंने आम जानवर की तरह युवराज का भी इम्तिहान लिया और नतीजा तुम्हारे सामने है। तुम्हारा मुंहबोला भाई हमारे इम्तिहान में फेल हो चुका है। अब तुम ही बताओ इन दोनों में से मुझे जंगल का राजा किसे घोषित करना चाहिए? शेरनी की राय देने से पहले ही लोमड़ी बोला।

महराज, राजा बनने की चाहत में मैं भूल गया था कि जंगल का राजा तो शेर ही होता। इसलिए युवराज शमशेर सिंह को ही राजा घोषित कीजिए। यह मेरी आपसे प्रार्थना है। फिर शेर सिंह युवराज शमशेर सिंह को जंगल का राजा घोषित कर देते हैं। घोषणा होते ही जंगल के सभी जानवर खुशी से झूम उठते हैं और एक साथ सभी बोल उठते हैं। शेर सिंह जिंदाबाद, शमशेर सिंह जिंदाबाद, शेरसिंह जिंदाबाद। शेरसिंह जिंदाबाद।

खुफिया जासूस| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

ये कहानी चंपक वन नाम के एक जंगल की है जहां पर शेर सिंह नाम का एक बाहुबली राजा राज करता था। शेर सिंह की गरज से जंगल का बच्चा बच्चा कांपता था। इसीलिए चंपक वन में कड़ा अनुशासन दिखाई देता था। शेर सिंह से सिर्फ चंपक वनवासी ही नहीं, आसपास के जंगल के प्राणी यहां तक कि वहां के राजा भी खौफ खाते थे। एक बार की बात है, चंपक वन में स्वाइन फ्लू फैला हुआ था। चारों ओर हाहाकार मचा हुआ था। जानवर हो या पक्षी सब फ्लू की चपेट में आ गए थे।

खुफिया जासूस| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

डॉक्टर टोडर भालू जंगल में जगह जगह पर कैंप लगाकर जंगल वासियों की मदद करो। कोई भी जीव जंतु इलाज से अछूता नहीं रहना चाहिए। पूरे जंगल में ऐलान कर दो कि महामारी खत्म होने तक अस्पताल का कोई भी कर्मचारी छुट्टी नहीं ले सकता। अस्पताल के सारे डॉक्टर और नर्स दिन रात जंगलवासियों की सेवा करेंगे। शेर सिंह के हुक्म के अनुसार टोडरमल भालू ने जंगल में जगह जगह कैंप लगा दिए थे।

एक दिन टोडरमल भालू अपने कैंप के आसपास जानवरों का निरीक्षण कर रहा था। तभी उसने देखा कि तालाब के पास घनी झाड़ियों के पीछे से किसी के कराहने की आवाज आ रही है। भालू आवाज की दिशा में आगे बढ़ा तो उसे झाड़ियों के पीछे एक लोमड़ी दिखाई दी, जिसकी हालत थोड़ी नाजुक दिखाई दे रही थी। अरे बल्लू बंदर, हाथी इधर आओ। देखो यहां एक लोमड़ी घायल अवस्था में पड़ी हुई है। जल्दी से उसे अपने कैंप तक लेकर चलो। इसे इलाज की सख्त आवश्यकता है।

खुफिया जासूस| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

डॉक्टर भालू की बात सुनकर जानवर उस लोमड़ी को उठाकर कैंप तक ले जाते हैं, जहां डॉक्टर भालू उसका इलाज करते हैं। दो तीन दिन के उपचार के बाद लोमड़ी की हालत में सुधार आ जाता है। अब तुम कैसा महसूस कर रही हो? मैं ठीक हूं। डॉक्टर भालू मेरी जान बचाने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। अच्छा एक बात बताओ, तुम हमारे जंगल की तो नहीं लगती? कौन हो तुम और यहां कैसे आ गई? आपने ठीक कहा बंदर भाई। मेरा नाम चिंकी है और मैं शहर से आई हूं।

हमारे शहरी जंगल में आपके चंपक वन के बड़े चर्चे हैं तो बस मैं यहां घूमने के लिए चली आई। लेकिन न जाने आस पास के जंगलों में ये कैसा वायरस फैला हुआ है कि आपकी चंपकवन पहुंचने से पहले ही मैं इस वायरस की चपेट में आ गई। किसी तरह गिरते पड़ते मैंने आपकी जंगल की सीमा तो पार कर ली, लेकिन बीमारी के कारण मैं बेहोश होकर वहां झाड़ियों के पास गिर पड़ी। उसके बाद क्या हुआ, मुझे कुछ याद नहीं।

उसके बाद हम तुम्हें उठाकर यहां लेकर आ गए और डॉक्टर भालू ने तुम्हारा इलाज कर दिया। आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया। क्या मुझे आपकी महाराज से मिलने का सौभाग्य मिल सकता है? हां हां क्यों। नहीं। चलो, मैं तुम्हें महाराज से मिलवा देता हूं। लोमड़ी महाराज शेर सिंह की गुफा के पास पहुंचती है। लोमड़ी देखती है कि गुफा के बाहर दो सफेद बाघ शेर सिंह की पहरेदारी में खड़े हुए हैं। अरे! शेर सिंह की गुफा का द्वार तो बंद है और ये दोनों बाघ यहां क्यों खड़े हुए हैं?

चीन की यह चंपक वन है। हमारे महाराज शेर सिंह यूं ही सबसे नहीं मिलते हैं। शेर सिंह अपनी गुफा में आराम कर रहे हैं। शेर सिंह पास वाली गुफा में रहते हैं। महाराज के गार्ड यानी के इन सफेद बाघों के अलावा कोई भी पासवर्ड नहीं जानता है। जब यह बाघ पासवर्ड डालते हैं तभी गुफा का दरवाजा खुलता है। यह सब हमारे जंगल की सुरक्षा व्यवस्था है। तुम्हें शायद पता नहीं हमारे पास वर्ल्ड क्लास सिक्योरिटी सिस्टम है। हां हां, वह तो मैं देख ही रही हूं। लेकिन क्या यह सफेद बाघ शेर सिंह की सुरक्षा करने में सक्षम है? मतलब अगर कल को कोई यहां हमला कर दे तो क्या ये बाघ महाराज को बचा पाएंगे?

बड़ी भोली हो तुम चिंकी। इन दोनों को साधारण बाघ समझने की भूल मत करना। यह कमांडो ट्रेनिंग ले चुके बाग हैं। ये दोनों मिलकर शेर मारकर नीचे गिरा सकते हैं। और क्या कहा तुमने? कोई हमला करेगा तो? अरे चंपक वन पर हमला करे। अभी तक इतना जिगरा आसपास के किसी जंगल में नहीं है। तुम्हें शायद पता नहीं कि दुश्मन हमारे जंगल में घुस भी नहीं सकते हैं। ऐसा क्या? लेकिन ऐसा कैसे हो सकता है? मुझे भी बताओ। बड़बोला बघीरा।

चिंकी की बात का जवाब दे पाता, इससे पहले ही महाराज शेर सिंह अपनी गुफा से निकलकर बाहर आ गए थे। चिंकी मुझे मेरे मंत्री ने बताया कि तुम शहर से चंपकवन देखने के लिए ही आई हो। हमें यह जानकर बहुत खुशी हुई कि हमारे चंपक वन की प्रसिद्धि दूर दूर तक फैल रही है। आप हमारी शाही मेहमान हैं। चंपक वन आपका स्वागत करता है। चिंकी को शेर सिंह से मिलकर बहुत खुशी होती है। वह भी शेर सिंह को धन्यवाद देकर जंगल की सैर पर निकल जाती है। बघीरा, तुम्हारे जंगल में कितने शेर हैं? क्या कभी यहां शाही गद्दी पर बैठने के लिए कोई लड़ाई नहीं होती?

चिंकी हमारे चंपक वन में इतने शेर हैं कि आस पास के 10 जंगलों में भी नहीं होंगे। सिर्फ शेर ही नहीं, हमारे पास तो हर प्रजाति के बाग भी हैं। मैंने तो यहां तक कि सुना है कि शेर सिंह ने एक कमांडो टीम भी तैयार की है, जिसमें बाघ और चीतों को भी भर्ती किया गया है और उन सबको शेर सिंह ने बॉर्डर के पास तैनात कर रखा है। और रही बात गद्दी पर बैठने की तो शेर सिंह बहुत बुद्धिमान और ताकतवर है।

उनके सामने सर उठाने की हिम्मत यहां पर किसी में भी नहीं है। बाघ हो या शेर शेर सिंह सबका सामना करते हैं और उन्होंने चंपक वन में सबको कुछ न कुछ इम्पोर्टेन्ट काम देकर रखा है जिससे हर कोई अपने को विशेष ही समझता है। बघीरा के साथ जंगल की सैर करते हुए चिंकी लोमड़ी एक के बाद एक प्रश्न पूछती जा रही थी और बघीरा एक अच्छे गाइड की तरह सारी बातों का बहुत अच्छे से जवाब दे रहा था।

जंगल की सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था के बारे में बघीरा से सुनकर चिंकी बहुत हैरान हो रही थी। तुमने बताया नहीं चिंकी कि तुम शहर में क्या करती हो? वह मैं एक स्कूल में पढ़ाती हूं। अरे वाह! ये तो बहुत अच्छी बात है।

बघीरा। एक बात कहूं, क्या तुम मुझसे दोस्ती करोगी? वैसे तो तुम्हारा जंगल वाकई बहुत अच्छा है, लेकिन इस पूरे जंगल में मुझे सबसे अच्छे तुम लगे हो। मेरा वैसे भी कोई दोस्त नहीं है। क्या तुम मेरे दोस्त बनना चाहोगे? चिंकी की बात सुनकर बघीरा को शर्म आ जाती है और सकुचाते हुए चिंकी से दोस्ती कर लेता है। वे दोनों साथ साथ जंगल का कोना कोना घूमते और बघीरा चिंकी को अपने जंगल के बारे में बताता जाता।

धीरे धीरे एक सप्ताह से अधिक समय हो गया। आधी रात का समय था। सभी जानवर अपने घरों में आराम कर रहे थे। तभी किसी ट्रांसमीटर के सिग्नल पकड़ने की घर्र घर्र की आवाज सुनाई देने लगती है। ट्रांसमीटर में सिग्नल आते ही चिंकी लोमड़ी फुसफुसाते हुए कुछ बात करने लगती है। हां, मैंने देख लिया है।

सभी लोग यहां सोए हुए हैं। अभी कोई खतरा नहीं है। ठीक है, मैं कैमरे से कुछ तस्वीरें भेजती हूं। ट्रांसमीटर को बंद करने के बाद लोमड़ी गड्ढा खोदकर एक कैमरा निकालती है और उसे लेकर दबे पांव जंगल में निकल जाती है। पूरे जंगल में घूम घूमकर वह अपने कैमरे से फोटो निकालती है और फिर वह सारी तस्वीरें लेकर वापस अपने टेंट की तरफ आ रही होती है कि तभी बघीरा की आंख खुल जाती है।

न जाने आज नींद क्यों नहीं आ रही है। एक बार चिंकी को देखकर आ जाता हूं। कहीं उसे किसी चीज की जरूरत तो नहीं। और अगर चिंकी झक्की होगी तो दोनों साथ साथ नदी किनारे जाकर सूरज उगते हुए देखेंगे। बघीरा मन ही मन सोचते हुए चिंकी के टेंट की तरफ जाने लगता है। कुछ दूर जाने पर उसे चिंकी अपने हाथ में कैमरा लिए टेन के अंदर जाती हुई दिखाई देती है। इतनी रात गई यह चिंकी कहां से आ रही है और उसके हाथ में कैमरा कहां से आया? कुछ तो गड़बड़ जरूर है।

बघीरा, चिंकी के टैंट के पास छिपकर उस पर नजर रखने लगता है। तभी चिंकी अपने टेंट के अंदर एक गड्ढा खोदकर उसमें से ट्रांसमीटर निकालती है। काम हो गया। सिर चमक। वन के चप्पे चप्पे की जानकारी और फोटोग्राफ लेकर मैं जल्द ही अपनी वतन लौटने वाली हूँ। अब हमें जीतने से कोई नहीं रोक सकता।

हाँ हाँ, मैं बिलकुल ठीक हूँ। जल्दी ही मिलते हैं। लोमड़ी की बातें सुनकर बघीरा बिलकुल हैरान रह गया। बघीरा उसी पल अपने घर जाता है और जानवरों को बेहोश करने वाली गन लेकर चिंकी के ट्रेन के पास आ जाता है और चिंकी लोमड़ी पर निशाना लगाता है। कुछ ही पलों में चिंकी बेहोश होकर नीचे गिर जाती है। बघीरा बेहोश चिंकी को लेकर शेर सिंह के पास पहुँचता है।

ये देखिए महाराज! मैंने तो पहले दिन ही कहा था कि यह चिंकी मुझे थोड़ी गड़बड़ लग रही है। लेकिन आपने कहा नहीं, यह तो हमारी मेहमान है। मैं जंगल का खूफिया एजेंट हूँ। हर चीज़ को संदिग्ध नजर से देखना ही मेरा काम है। इस चिंकी को अच्छे से जानने के लिए मैं जान बूझकर इसके साथ समय बिता रहा था।

देखिये मैं इस खूफिया जासूस लोमड़ी के खिलाफ सारे सबूत लेकर आया हूँ। लोमड़ी हथकड़ी पहने हुए शेर सिंह के सामने खड़ी हुई थी। तभी बघीरा कहता है। अरे तुम कैसी जासूस हो? इतने दिनों से मेरे साथ घूम रही है और खुद जासूस होकर एक दूसरे जासूस को पहचान भी नहीं पाई। तुम जासूसों मतलब इतने दिनों से तुम भोले भाले बनने का नाटक कर रहे थे और तुम्हारी दोस्ती और प्यार सब दिखावा था।

क्या करूं? चिंकी रानी, अपने प्रोफेशन में ये सब तो करना ही पड़ता है। वह एजेंट भी क्या एजेंट जिसपर किसी को शक हो जाए? देख मस्त एक्टिंग की है न? मैंने बघीरा की बात सुनकर चिंकी दांत पीसी रह जाती है। बघीरा की सूझबूझ के कारण चिंकी लोमड़ी अपने मकसद में कामयाब नहीं हो पाती और उसे चंपकवन के कारागार में बंद कर दिया जाता है।

बूढ़ा दादा और शेर सिंह| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

एक घने जंगल में शेरखान का राज चलता था। चीता हो या हाथी। शेरखान की एक दहाड़ से जंगल के सभी प्राणी कांप उठते थे। उसी जंगल के पास एक छोटा सा गांव था, जिसमें कुछ गिने चुने ही लोग रहते थे। उस छोटे से गांव को छोड़कर बाकी जंगल के चप्पे चप्पे पर मेरा राज चलता है। मेरा बहुत मन है कि मैं एक बार जाकर उस गांव में ज़रा देखूं कि गांव के अंदर के लोग कैसे रहते हैं। लेकिन मुझे हर बार पिताजी की कही बातें याद आ जाती हैं।

बूढ़ा दादा और शेर सिंह| Hindi Kahani | Hindi Kahaniya

कुछ समय पहले शेरखान के पिता शमशेर खान बेटा। इस जंगल के किनारे पर ही एक छोटा सा गांव पड़ता है। कहने को तो उस गांव में चंद गिने चुने ही लोग रहते हैं, लेकिन वादा करो तुम कभी भी उस गांव में नहीं जाओगी। लेकिन पिताजी अक्सर उस गांव में कुछ गिने चुने ही लोग रहते हैं। तो फिर हम उस गांव में क्यों नहीं जा सकते?

बेटा। इस गद्दी पर बैठने से पहले मुझे भी मेरे पिता ने यही समझाया था कि जंगल की सीमा के बाहर जाकर कभी कुछ मत करना। उस गांव में आदिवासी रहते हैं और इंसान जानवर से कई गुना अत्यधिक खतरनाक होता है। इसलिए तुम हमेशा अपने दायरे में रहकर ही जंगल पर राज करना। अगर तुम इंसानों की बस्ती में नहीं जाओगे तो इंसान भी जंगल में आकर हम जानवरों को परेशान नहीं करेंगे। मैं अपने पिताजी की बात मानकर उस गांव में कभी भी नहीं गया।

पिताजी की बात सुनकर शेर खान अपने पिता शमशेर खान से वादा करता है कि वह कभी भी जंगल की सीमा पार नहीं करेगा और उस जंगल में नहीं जाएगा। किंतु उसके मन में कहीं न कहीं यह इच्छा जरूर थी कि वो एक बार इंसानों की बस्ती में जाकर देखे कि इंसान कैसे रहते हैं, उनका राजा कौन होता है और उनका जीवन किस तरह का होता है। एक बार की बात है। शेर खान जंगल की सैर पर निकलता है। चलते हुए अचानक शेर खान एक शिकारी के जाल में फंस जाता है।

कोई है, कोई मेरी मदद करो। लगता है दिन ढलने के कारण जंगल के सभी प्राणी अपने अपने घर लौट चुके हैं। अब मेरी मदद कौन करेगा? शेरखान जोर जोर से दहाड़ रहा था, लेकिन कोई भी उसकी मदद के लिए नहीं आता। तभी एक आदमी वहां आता है और वह अपनी जेब में रखे धारदार चाकू से शेरखान के जाल को काटकर उसे मुक्त कर देता है।

उस बूढ़े व्यक्ति की दरियादिली को देखकर शेरखान उससे बहुत प्रभावित होता है। एक इंसान होकर आपने मेरी इतनी बड़ी मदद की, उसके लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया। यदि आपको कोई ऐतराज न हो तो मैं आपको अपना मित्र बनाना चाहूंगा। शेरखान की यह बात सुनकर वह व्यक्ति खुश हो जाता है। शेरखान मुझे भी जंगल के राजा के साथ दोस्ती करने में बहुत खुशी होगी। मेरा नाम राजू है और मैं अक्सर जंगल के बाहरी हिस्सों से लकड़ियां काटकर ले जाता हूं। लेकिन आज मुझे कोई सूखा पेड़ लकड़ियां काटने के लिए मिला ही नहीं।

इसीलिए मैं जंगल के काफी अंदर तक आ गया। लेकिन आते समय मुझे बहुत घबराहट हो रही थी कि कहीं कोई जंगली जानवर मेरे ऊपर हमला न कर दे। तभी मेरी नजर आपके ऊपर पड़ी और मन ही मन मुझे आपसे बहुत डर लग रहा था कि कहीं आप मुझे खा न जाएं, लेकिन आपको कष्ट में देखकर मैं खुद को रोक नहीं सका। इसलिए मैंने जाल काटकर आपकी सहायता की।

आपकी दरियादिली के लिए मैं आपका बहुत बहुत आभारी हूं। मेरे दोस्त हो सके तो आप रोज मुझसे मिलने के लिए जंगल आ सकते हैं। आपको जंगली जानवरों से डरने की कोई आवश्यकता नहीं है। आप शेर खान के दोस्त हैं और शेर खान के दोस्त पर कोई नजर डाल सके। इतने जंगल में किसी की हिम्मत नहीं है।

अब तो रामू अक्सर शेर खान से मिलने जंगल आने जाने लगता है। वो दोनों घंटों साथ में बैठकर बातें करते हैं। रामू से इंसान और इंसान की बस्ती के बारे में तरह तरह की बातें बताता है तो वहीं शेर खान रामू को जंगल और जंगली जानवरों के बारे में तरह तरह की बातें बताता है। इस तरह दिन प्रतिदिन उनकी दोस्ती और गहरी होती जाती है। एक दिन। मित्र। आपको ऐतराज न हो तो मैं आपसे एक बात कहना चाहता हूं।

शेरखान मित्र के साथ इतना संकोच करना सही नहीं है। आपको जो भी कहना है, आप स्पष्ट कह सकते हैं। यदि हो सके तो आप मुझे एक बार अपने गांव में ले जाइए। मैं एक बार इंसानों की बस्ती देखना चाहता हूं। शेरखान की बात सुनकर रामू मुस्कुरा कर कहता है। बस इतनी सी बात। आप मेरे मित्र हो। आज से तीन दिन के बाद आप मेरे गांव चलेंगे। आपका स्वागत करने में मुझे बहुत खुशी होगी। रामू की बात सुनकर शेरखान मन ही मन बहुत प्रसन्न होता है और तीसरे दिन खुशी खुशी रामू के साथ गांव पहुंच जाता है।

अरे देखो देखो भाई लोग, यह रामू के साथ कौन हमारे गांव में चला आ रहा है और यह शहर कौन है? जब से इसे यहां से जिंदा वापस नहीं जाने देंगे। ठीक कहते हो भाई लोग। तुम जैसे हमने इसके बाप और दादा को। मारा था वैसे ही आज इसकी बलि देकर अपने कबीले की देवी को प्रसन्न करेंगे। फिर गांव वाले शेरखान को घेर लेते हैं। रामू तू हट जा। आज हम शेरखान की बलि देकर कबीले। की देवी को प्रसन्न करेंगे।

यह आप लोग कैसी बातें कर रहे हैं? एक निर्दोष जानवर को इस तरह घेरकर मारना बहुत बड़ा पाप है। और वैसे भी यह तो मेरा मित्र है जो सिर्फ मेरे बुलाने पर ही हमारे गांव आया है। यह हमारे गांव में भी किसी को हानि पहुंचाने के लिए नहीं आया है। यह यह शेरखान है इसके खानदान की हमारे गांव से कई पीढ़ियों से दुश्मनी चलती आ रही है।

तुम बीच में मत आओ। कहीं ऐसा न हो कि तुम भी हमारे गुस्से का शिकार हो जाओ। चाहे जो हो जाए, भाई, मैं ऐसी मुसीबत में अपने मित्र का साथ नहीं छोड़ सकता। मेरे ही कारण शेरखान इतनी बड़ी मुसीबत में फंस गया है। मेरी बात मानो, शेरखान को यहां से जाने दो। मैं वादा करता हूं कि आइंदा कभी भी हमारे गांव वापस नहीं आएगा।

रामू के बार बार विनती करने पर गांववाले शेरखान को जंगल की ओर वापस जाने देते हैं। शेरखान की जान तो बच गई है, लेकिन मुझे इस बात का बहुत अफसोस है कि मेरी वजह से शेरखान का बहुत अपमान हुआ है। मुझे शेरखान से माफी मांगनी चाहिए। ऐसा सोचकर रामू माफी मांगने के लिए जंगल में पहुंच जाता है।

लकडियां काटने के बाद रामू इधर उधर देखता है, लेकिन आज उसे शेरखान कहीं नजर नहीं आता। अरे शेरखान, तुम मुझे रोज यहीं पहाड़ी के पास मिला करता था। आज शेरखान कहां चला गया? शेरखान को तलाशने के लिए रामू जंगल में काफी अंदर की ओर चला जाता है। तभी जंगली जानवर रामू को घेर लेते हैं। आज तो इंसान का ताजा ताजा मांस मुझे खाने के लिए मिलेगा। मजा ही आ जाएगा मुझे।

मेरे मुंह में तो अभी से पानी आ रहा है। आज तो जंगल में मंगल हो जाएगा और गद्दारों को चीरकर टुकड़े करने का तो मजा भी वैसे ही कुछ अलग ही होता है। सभी जानवर मिलकर रामू को मारने के लिए आगे आते हैं। अब अचानक से शेर खान की दहाड़ सुनाई देती है। शेरखान की आवाज सुनकर सभी जानवरों की रूह कांप जाती है और वह रुक जाते हैं।

यह क्या हो रहा है यहां पर? यह मेरा दोस्त रामू है। अगर इसे खरोच भी आई तो तुम सबको मार डालूंगा।

मैं वह गुस्ताखी माफ। शेरखान लेकिन लेकिन आज तुम कुछ गलत कर रहे हो। तुम शायद भूल रहे हो कि इस रामू ने तुम्हें मारने का यंत्र रचा था और तुम अभी भी इसके साथ दोस्ती निभा रहे हो। तुम लोग रामू को गलत समझ रहे हो। रामू ने मुझे मारने की कोई साजिश नहीं रची थी, बल्कि उसने तो मेरी जान बचाई है।

अगर उस दिन यह न होता तो गांव वाले मुझे मार ही डालते। मेरी जान बचाने के लिए इसने तो अपनी जान की भी परवाह नहीं की थी। उनसे गलती हो गई। दोस्त हमने तुम्हें दुश्मन समझा, लेकिन तुमने तो हमारे महाराज शेर खान की जान बचाई है। से ये जंगल और जंगल के सारे जानवर तुम्हारे ऋणी हुए। क्या तुम शेर खान की तरह हम सब से भी दोस्ती करना चाहोगे? इतने सारे दोस्त बनाने में मुझे बहुत ज्यादा खुशी होगी। आज से हम सब दोस्त हैं।

दहशतगर्द भेड़िया| Hindi Kahani| Hindi Kahaniya

जंगल के सभी जानवर डरे हुए थे क्योंकि उन्होंने जंगल में एक ऐसा खूंखार भेड़िया देखा था जो आज से पहले उन्होंने कभी नहीं देखा था। सभी जानवर डरे हुए आपस में बात कर रहे थे। अरे भाई जंगल में इतने खतरनाक खतरनाक जानवर आए हैं। लेकिन जिस तरह वह भेड़िया खतरनाक लगता है ना, इतना खतरनाक जानवर तो हमने आज तक कभी भी नहीं देखा। सही कह रहे हो भाई। उसके बड़े बड़े नुकीले दांत हैं और बड़े बड़े पंजे भी।

दहशतगर्द भेड़िया| Hindi Kahani| Hindi Kahaniya

सच कहूं तो वह किसी शेर से कम नहीं लगता। बहुत ही खूंखार लगता है वह। तभी वहां एक बकरी भागती हुई आती है और हांफते हुए कहती है, भाई तुम सही कह रहे हो। मैं तो भाग्यशाली रही। अभी उनके चंगुल से बच कर आई वरना आज तक जो भी उनके चंगुल में फंसा है, जिंदा बचकर वापस नहीं आया है। पूरे जंगल में यही बात चल रही थी। बात शेर खान तक भी पहुंच गई। तब शेर खान जानवरों के पास आकर बोला। तुम लोग बेवजह ही इतना डर रहे हो भला मुझसे ज्यादा खतरनाक जानवर और कौन हो सकता है? मैं शेर हूं, जंगल का राजा, बाकी सारे जानवर। मेरे सामने पानी कम है।

अभी आपने उस खूंखार दहशतगर्द भेड़िये को देखा ही नहीं है। अगर आपने उसे देख लिया ना तो आप भी हमारी तरह डरे हुए नजर आएंगे। ऐसा भी क्या है उस भेड़िये में? आज मैं पहले उसको ही देखूंगा। बताओ मुझे कहां मिलेगा वो? जरा मैं भी तो देखूं मुझसे ज्यादा खतरनाक जानवर कौन आ गया? राजेश जी वो पास वाली गुफा के पास ही दिखता है। हो सकता है वह वहीं रहता होगा। उसने मुझ पर अटैक भी वहीं किया था। तुम लोग चिंता मत करो। आज मैं खुद जाकर उस भेड़िया का सामना करूंगा और देखता हूं कि आखिर वह कितना दहशतगर्द भेड़िया है।

यह कहकर शेर खान वहां से उस गुफा की ओर चला गया। पर रात के अंधेरे में शेर खान वहीं चौकन्ना होकर बैठ गया। तभी उसे पत्तों के हिलने डुलने की आवाज आई। शेरखान और भी चौकन्ना हो गया। वह बस ताक में बैठा था कि कब कोई झाड़ियों से बाहर निकले और हमला करे। लेकिन जैसे ही झाड़ियों से जानवर बाहर निकला। भेड़िये को देखकर शेरखान डर कर उल्टे पांव भाग गया और डरे भी क्यूं ना?

क्योंकि उस जानवर का मुंह भेड़िए जैसा था। खाल शेर जैसी, पूंछ चीते जैसी और पंजे बाघ की जैसी थी। इतना अजीबो गरीब भेड़िया शायद शेर खान ने पहले कभी देखा ही नहीं था। वो डर के मारे वापस आ गया। अगले दिन जानवरों ने उससे पूछा क्या हुआ? शेरखान आपने उस जानवर को देखा ही नहीं। हां, मैंने उस जानवर को देखा। तुम लोग सच कह रहे थे। वह सच में बहुत डरावना और अजीब भेड़िया है। मेरी माने तो तुम लोग रात के समय बाहर मत निकलना।

तभी बकरी हंसते हुए बोली। शेरखान की टायटल फिक्स हो गई। सभी जानवर शेर खान की खराब हालत देखकर वहां से हंसते हुए चले गए। लेकिन शेर खान अपनी इतनी बेइज्जती बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसने मन में सोचा। मैं जंगल का राजा हूं। यह बात मुझे साबित करके दिखानी होगी। वरना अब सभी जानवरों के सामने मेरी नाक कट जाएगी। उसी दिन से शेर खान उस दहशतगर्द भेड़िए की ताक में रहने लगा। इस बार वह सुबह के समय ही वहां जाकर छुप गया। तभी शेर खान ने देखा कि एक कुत्ता गुफा की ओर जा रहा है और कई घंटों के बाद भी वह वापस नहीं लौटा। यह देखकर शेर खान के दिमाग में एक विचार आया।

कहीं यह वही कुत्ता तो नहीं जो खूंखार भेड़िया बनकर बाहर सभी जानवरों को डरा रहा है। मुझे इसका पता लगाना होगा। यह सोचकर शेर खान धीरे धीरे गुफा की तरफ बढ़ने लगा। शेर खान का शक बिल्कुल सही था। उसके सामने एक कुत्ता भेड़िए के भेष में खड़े होकर हंस रहा था। कितना मजा आ रहा है मुझे। सर्कस वालों की यह ड्रेस क्या मिल गई? मैं तो पूरे जंगल के जानवरों को डरा रहा हूं। कोई भी मुझे पहचान नहीं पा रहा।

सबके सब जानवर दहशत में हैं। सिर्फ मेरे नाम से ही डरते हैं। वैसे जो भी हो, मुझे तो इसमें बहुत मजा आ रहा है। तभी शेरखान बोलता है। तो यह कुत्ता भेष बदलकर सब जानवरों को डरा रहा है। इसे अभी मजा चखाता हूं। शेरखान उस पर वही हमला करना चाहता था, पर तभी उसके मन में विचार आया और वह वापस जंगल में आ गया और जंगल में आकर जानवरों से बोला।

जो तुम दहशतगर्द भेड़िए से जाकर कहो कि वह आकर मुझसे मुकाबला करे। मैं भी देखता हूं कि सबसे ज्यादा ताकतवर कौन है। अरे शेरखान क्यों मरना चाहते हो तुम? कल तो तुम दुम दबाकर भाग गए थे। आज फिर से उसी तरह दुम दबाकर भागने का इरादा है क्या तुम्हारा? नहीं नहीं, ऐसा कुछ भी नहीं है। आज मैं तुम सबके सामने उस दहशतगर्द भेड़िए का असली चेहरा सामने लाकर रहूंगा। आप कहना क्या चाहते हो? शेरखान साहब साहब, कहो ना। नहीं, अब मैं कुछ नहीं कहूंगा, बल्कि तुम सबको दिखाऊंगा। उस दहशतगर्द भेड़िए को सबक सिखाकर ही रहूंगा मैं।

यह कहकर शेरखान वहां से चला गया। जानवरों ने इधर उधर बात फैला दी कि शेरखान ने भेड़िये को ललकारा है और यह बात भेड़िए तक भी पहुंच गई। फिर शाम हो गई और भेड़िया बाहर निकला और उसने सभी जानवरों को घेर लिया। सारे जानवर उसके भयानक रूप को देख कर इधर उधर भागने लगे।

यह देखकर शेरखान बोला। तुम सबको इससे डरने की कोई जरूरत नहीं है। मैं इससे ज्यादा शक्तिशाली हूं। शेरखान ये तुम क्या कह रहे हो? इससे पहले यह दहशतगर्द भेड़िया तुम्हें मार दे। भाग जाओ तुम यहां से। तभी शेरखान ने उस दहशतगर्द भेड़िये को एक पंजा मारा। और उसका नकाब उसके मुंह से गिर गया। नकाब के पीछे छुपा कुत्ते का चेहरा सबके सामने आ गया। उसे देखकर सभी जानवर हैरान रह गए और उसकी सच्चाई शेर खान ने सबको बताई।

देखो मेरे जंगलवासियों! ये है तुम्हारा दहशतगर्द भेड़िया। अच्छा तो इस कुत्ते ने मुझपर हमला किया था। इस कुत्ते को तो मैं बिल्कुल नहीं छोडूंगी। नहीं। कोई इसे कुछ नहीं बोलेगा क्योंकि मुझे सच जानना है। आखिर इसने ये सब क्यों किया? अब तुम सबको खुद बताओ कि तुम्हारा ये सब करने के पीछे असली वजह क्या थी? फिर कुत्ते ने भी सारी सच्चाई बताई।

मैं सरकस में इंसानों के साथ काम करता था। मेरा मालिक मुझसे बहुत काम करवाता था और मेरे साथ बहुत बदसलूकी भी करता था। यहां तक कि वो मुझे भरपेट खाना भी नहीं देता। फिर एक दिन मैं उसके चंगुल से बचकर भाग निकला। पर तभी मेरे हाथों में भेड़िये की कॉस्टयूम लग गई और मैं उसे पहनकर तुम्हारे जंगल से गुजर रहा था। अच्छा तो फिर तुमने सोचा कि तुम हम सबको डरा कर जंगल पर राज करोगे?

वहां कुछ जानवरों ने मुझे देखा और वो डरकर भागने लगे। तभी मेरे दिमाग में आइडिया आया कि क्यों ना मैं एक दहशतगर्द भेड़िया बन जाऊं और यहां पर राज करूं। तुम्हारे साथ तुम्हारे मालिक ने बहुत बड़ा अन्याय किया है। पर तुमने भी मेरे जंगलवासियों के साथ बहुत गलत किया है। इसीलिए तुम्हें सबसे माफी मांगनी चाहिए। क्यों जंगलवासियों? मैंने सही कहा ना। हां हां, आपने बिल्कुल सही कहा।

शेरखान इससे तो सबसे माफी मांगनी ही चाहिए। हां हां, इसे हम सब से माफी मांगनी होगी। मैं अपने किए पर बहुत ज्यादा शर्मिंदा हूं। इसीलिए अब सबसे माफी मांगता हूं और वादा करता हूं कि आगे से ऐसा कुछ भी नहीं करूंगा। ठीक है, तुम अब इसी जंगल का हिस्सा हो। और ये बात याद रखना कि तुम्हें सारे जानवरों को अपना परिवार मानकर उनके साथ प्रेम से रहना है।

फिर सभी जानवर उस झूठे दहशतगर्द भेड़िये को यानी कुत्ते को माफ कर देते हैं और वो हमेशा के लिए उसी जंगल में रहने लगता है। आपको हमारा यह वीडियो पसंद आया हो तो प्लीज हमारे चैनल को सब्सक्राइब कीजिए और हां वीडियो को लाइक और शेयर करना मत भूलना। धन्यवाद।

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