Emotional Story

Emotional Story

Emotional Story – दुख की परछाई में खोया बचपन

Emotional Story - दुख की परछाई में खोया बचपन

एक छोटे से गांव में रहता था एक आठ साल का लड़का रामू। रामू का बचपन बड़े ही दुखों से भरा था। उसके पिता की एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी और उसकी माँ बीमार रहती थी। रामू का परिवार बहुत ही गरीब था। रामू के पास खाने के लिए भी ठीक से नहीं था। वह अपने गांव के स्कूल में जाता था, लेकिन वह हमेशा गंदे-मैले कपड़ों में और भूख से परेशान रहता था। दूसरे बच्चे उसे चिढ़ाते थे और उससे बात नहीं करते थे।

रामू को अक्सर अपने पिता की याद आती थी। वह याद करता था कि कैसे उसके पिता उसे कंधों पर बैठाकर घुमाते थे और उसे कहानियाँ सुनाते थे। रामू को अपनी माँ से भी बहुत प्यार था। वह जानता था कि उसकी माँ बीमार हैं और वह बहुत दर्द में रहती हैं। रामू अपनी माँ की मदद करने की कोशिश करता था, लेकिन वह बहुत छोटा था और वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था।

एक दिन रामू अपनी माँ के लिए बाजार से दवाई लेने गया था। जब वह वापस लौट रहा था, तो उसने देखा कि एक अमीर आदमी का बेटा सड़क पर रो रहा था। रामू ने उस लड़के से पूछा कि क्या हुआ है। लड़के ने बताया कि उसने अपना नया खिलौना खो दिया है। रामू ने उस लड़के को खिलौना ढूंढने में मदद की, लेकिन उन्हें खिलौना नहीं मिला।

लड़का बहुत रो रहा था और वह रामू को गाली देने लगा। रामू बहुत दुखी हो गया और वह वहाँ से चला गया। वह किसी से बात नहीं करना चाहता था। वह सिर्फ एक ऐसे कोने में जाकर बैठना चाहता था, जहाँ कोई उसे न देख सके।

रामू एक पेड़ के नीचे जाकर बैठ गया और वह रोने लगा। वह अपने दुखी बचपन के बारे में सोचने लगा। वह सोचता था कि क्यों उसका जीवन इतना दुखों से भरा है। वह क्यों इतना गरीब है और क्यों उसके पास खाने के लिए भी ठीक से नहीं है। वह क्यों दूसरे बच्चों की तरह खुश नहीं रह सकता है।

रामू बहुत देर तक रोता रहा। वह अपने जीवन से निराश हो गया था। वह सोचता था कि वह कभी खुश नहीं रह पाएगा।

तभी एक हाथ उसके कंधे पर रखा। रामू ने देखा कि एक बूढ़ी औरत उसके सामने खड़ी है। बूढ़ी औरत ने रामू को प्यार से देखा और उससे पूछा कि क्या हुआ है। रामू ने उसे अपने दुखों के बारे में बताया।

बूढ़ी औरत ने रामू को समझाया कि जीवन में दुख और सुख दोनों आते हैं। हर किसी के जीवन में कुछ न कुछ परेशानियाँ होती हैं। लेकिन हमें इन परेशानियों से निराश नहीं होना चाहिए। हमें इन परेशानियों का सामना करना चाहिए और आगे बढ़ना चाहिए।

बूढ़ी औरत ने रामू को यह भी बताया कि वह हमेशा अकेला नहीं है। उसके बहुत सारे लोग हैं जो उससे प्यार करते हैं और उसकी मदद करना चाहते हैं।

रामू को बूढ़ी औरत की बातें सुनकर बहुत अच्छा लगा। वह उससे बहुत खुश हो गया। वह अब निराश नहीं था। वह जानता था कि वह अपने जीवन के दुखों से निराश नहीं होगा और वह आगे बढ़कर एक खुशहाल जीवन जीएगा।

Emotional Story – एक माँ की ममता

Emotional Story - एक माँ की ममता

एक छोटे से गाँव में एक विधवा माँ रहती थीं, उनके नाम मोती देवी था। वह बहुत ही गरीब थीं और अपने एकलौते बेटे रामू का पालने के लिए दिन-रात मेहनत करती थीं। रामू एक 10 साल का बच्चा था, जो अपनी माँ से बहुत प्यार करता था।

एक दिन मोती देवी बीमार पड़ गईं। वह बहुत ही कमजोर हो गईं और उठने-बैठने का भी हाल नहीं रहा था। रामू अपनी माँ की सेवा में लगा रहता था। वह उन्हें दवाइयाँ देता था और उनका खाना-पीना भी वह ही उठाता था।

एक दिन मोती देवी ने रामू को अपने पास बुलाया और कहा, “रामू, बेटा! अब मेरा समय पूरा हो गया है। मैं जल्दी ही इस दुनिया को छोड़कर चली जाऊँगी।”

यह सुनकर रामू बहुत रोने लगा। वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता था और उनका ख्याल रखना चाहता था।

मोती देवी ने रामू को अपने सीने से लगा लिया और कहा, “रामू, बेटा! तुम बड़े होकर अच्छे इंसान बनना। अपनी माँ को हमेशा याद रखना और उनसे जो प्यार तुम करते हो, उसे हमेशा बनाए रखना।”

यह कहकर मोती देवी की आँखें बंद हो गईं। रामू बहुत रोया और अपनी माँ को गले लगा लिया। वह अपनी माँ को कभी नहीं भूल सकता था।

रामू अपनी माँ की बातों को हमेशा याद रखता था। वह बड़ा होकर एक अच्छा इंसान बना और अपनी माँ को हमेशा प्यार करता रहा।

शिक्षा:

यह कहानी हमें बताती है कि माँ का प्यार सबसे बड़ा प्यार होता है। हमें अपनी माँ की हमेशा इज्जत करनी चाहिए और उनकी सेवा करनी चाहिए।

शब्दों का अर्थ:

एकांत – अकेला व्यथा – दर्द कमजोर – कमजोर इंसाफ़ – न्याय अवसर – मौका

कहानी का उद्देश्य:

इस कहानी का उद्देश्य माँ के प्यार को बताना है। यह कहानी हमें यह भी बताती है कि हमें अपने माँ-बाप की सेवा करनी चाहिए और उनका आदर करना चाहिए।

Emotional Story – माँ का प्यार

Emotional Story - माँ का प्यार

दुआ का शहर, अजमेर में रहने वाले एक छोटे से परिवार की कहानी है जो अपने जीवन की उथल-पुथल के बीच भी माँ के प्यार की वजह से एक साथ बंधे रहते हैं। परिवार में पिताजी, माँ, और उनकी तीन बेटियाँ थीं। पिताजी एक छोटे से दुकानदार थे और माँ घर संभालती थीं। बड़ी बहन लक्ष्मी, घर की बड़ी थी, जो अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर के कामों में भी माँ का हाथ बंटाती थी। दूसरी बहन गीता, पढ़ाई में बहुत तेज थी और उसका सपना डॉक्टर बनने का था। सबसे छोटी बहन राधा, नन्ही सी थी और घर में सबकी लाडली थी।

एक दिन पिताजी को अचानक से बीमारी हो गई और घर में दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। पिताजी का इलाज कराने में घर की सारी बचत खत्म हो गई और परिवार पर एक भारी कर्ज भी हो गया। इस मुश्किल घड़ी में माँ ने हार नहीं मानी और अपने बच्चों का हौसला बढ़ाते हुए उन्हें कहा कि “हमें साथ रहना है और मिलकर इस मुश्किल से पार पाना है”।

माँ ने घर के सारे कामों को अपने हाथों में ले लिया और बच्चों को पढ़ाई करने के लिए प्रेरित किया। लक्ष्मी ने भी अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर के कामों में माँ की और भी मदद करने लगी। गीता अपनी पढ़ाई में और मेहनत करने लगी और अपने सपने को पूरा करने का संकल्प लिया। राधा, जो अभी छोटी थी, वह भी अपने बड़े बहनों को देखकर सीख रही थी और घर में हर किसी की मदद करने की कोशिश करती थी।

माँ का प्यार और त्याग बच्चों के लिए एक सहारा था और उनकी मुश्किलों को दूर करने में मददगार था। लक्ष्मी ने अपनी ग्रेजुएशन पूरी कर ली और एक नौकरी मिल गई। गीता ने अपनी मेहनत के बल पर मेडिकल कॉलेज में दाखिला ले लिया और डॉक्टर बनने के सपने को पूरा करने के लिए आगे बढ़ गई। राधा भी बड़ी हो गई थी और वह भी अपनी पढ़ाई में ध्यान देने लगी थी।

माँ का प्यार ही था जिसने इस परिवार को एक साथ बांधे रखा और उनकी मुश्किलों को दूर करने में मदद की। माँ का त्याग और निस्वार्थ भावना उनके बच्चों के लिए एक प्रेरणा थी और उनके जीवन को सफल बनाने में मददगार थी।

Emotional Story – दुख का पहाड़, खुशी की किरण

Emotional Story - दुख का पहाड़, खुशी की किरण

एक छोटे से गाँव में एक गरीब परिवार रहता था। परिवार में एक बूढ़ा आदमी, उसकी बूढ़ी पत्नी और उनका बेटा अशोक था। अशोक एक मेहनती और ईमानदार लड़का था। वह दिन में मजदूरी करता था और रात में पढ़ाई करता था। वह अपने माता-पिता का बहुत ख्याल रखता था।

एक दिन अशोक के पिता बीमार पड़ गए। उनके इलाज के लिए बहुत सारे पैसे की जरूरत थी। अशोक ने दिन-रात मेहनत की, लेकिन फिर भी पैसे नहीं जुटा सके। आखिरकार, उसके पिता का देहांत हो गया।

अशोक का परिवार बहुत दुखी था। अशोक की माँ रो-रो कर बेहाल हो गई। वह अपने बेटे को अकेले छोड़कर जाने के लिए बहुत दुखी थी।

अशोक अपनी माँ का दुख देखकर बहुत दुखी था। उसने अपनी माँ को समझाया कि वह अब अकेली नहीं है। वह उसके साथ है और वह उसकी देखभाल करेगा।

अशोक ने अपनी माँ को खुश करने के लिए बहुत कोशिश की। वह दिन में मजदूरी करता था और रात में अपनी माँ के लिए गाना गाता था। वह अपनी माँ को हँसाने की कोशिश करता था।

धीरे-धीरे अशोक की माँ का दुख कम होने लगा। वह अपने बेटे के प्यार से खुश थी। वह जानती थी कि वह अकेली नहीं है।

एक दिन अशोक को एक बड़े शहर में नौकरी मिल गई। वह शहर गया और वहाँ रहने लगा। वह अपनी माँ को हर महीने पैसे भेजता था।

अशोक की माँ शहर नहीं जा सकती थी। वह अपने गाँव को छोड़ना नहीं चाहती थी। वह अशोक के लिए अपने गाँव में ही रहती थी।

कुछ साल बाद अशोक एक बड़ा अफसर बन गया। वह अपने गाँव आया और अपनी माँ को अपने साथ शहर ले गया। वह अपनी माँ को बहुत खुश रखना चाहता था।

अशोक की माँ शहर में रहने लगी। वह अपने बेटे के साथ रहकर बहुत खुश थी। वह अपने बेटे पर बहुत गर्व करती थी।

अशोक की माँ एक दिन बहुत बूढ़ी हो गई। वह बीमार पड़ गई। अशोक ने उसकी बहुत देखभाल की। लेकिन अशोक की माँ की जान नहीं बच सकी।

अशोक अपनी माँ के गुजर जाने से बहुत दुखी था। वह अपनी माँ को बहुत याद करता था। लेकिन वह जानता था कि उसकी माँ अब स्वर्ग में है। वह खुश है और उसे किसी तरह का दुख नहीं है।

अशोक ने अपनी माँ की याद में एक मंदिर बनवाया। वह हर दिन मंदिर जाता था और अपनी माँ की पूजा करता था। वह अपनी माँ से बहुत प्यार करता था।

Emotional Story – दया का सागर

Emotional Story - दया का सागर

दिल्ली की चमचमाती सड़कों पर, एक अनाथ लड़की अंजली भटक रही थी। उसके माता-पिता उसे एक छोटी सी उम्र में ही छोड़कर चले गए थे, और वह तब से सड़कों पर ही पल रही थी।

अंजली को भूख, ठंड और अकेलेपन का सामना करना पड़ा। लोग उसे एक अवांछित बच्चे के रूप में देखते थे, और कोई भी उसकी मदद नहीं करना चाहता था।

एक दिन, अंजली एक मंदिर के सामने बैठी हुई थी, जब उसने एक बुजुर्ग महिला को देखा। महिला अंजली की ओर चल पड़ी और उससे पूछा कि क्या वह भूखी है।

अंजली ने हां में सिर हिलाया, और महिला ने उसे मंदिर के अंदर ले जाकर उसे खाना खिलाया। महिला ने अंजली से उसके बारे में पूछा, और अंजली ने उसे अपनी कहानी सुनाई।

महिला का दिल अंजली की कहानी सुनकर भर गया। उसने अंजली को अपने घर ले जाने का फैसला किया और उसे अपनी बेटी की तरह पालने का वादा किया।

अंजली महिला के घर पर बहुत खुश थी। महिला ने उसे प्यार और देखभाल दी, जिसकी उसे इतनी जरूरत थी। अंजली ने महिला को “दादी” कहना शुरू कर दिया, और दोनों एक दूसरे के बहुत करीब हो गए।

अंजली महिला के साथ मंदिर जाती थी, और धीरे-धीरे उसे भगवान में आस्था होने लगी। वह जानती थी कि भगवान हमेशा उसके साथ थे, और वह कभी अकेली नहीं होगी।

एक दिन, महिला बीमार पड़ गई। अंजली उसकी बहुत देखभाल करती थी, और वह हमेशा उसके साथ रहती थी। लेकिन कुछ समय बाद, महिला का निधन हो गया।

Emotional Story - दया का सागर

अंजली का दिल टूट गया था। उसने अपनी दादी को बहुत याद किया, और वह नहीं जानती थी कि वह उसके बिना कैसे जीएगी।

लेकिन अंजली ने अपनी दादी के शब्दों को याद रखा। दादी ने हमेशा कहा था कि भगवान हमेशा हमारे साथ रहते हैं, और वह कभी अकेले नहीं होंगे।

अंजली ने अपनी दादी की बातों पर विश्वास किया, और वह धीरे-धीरे अपने दर्द से उबरने लगी। वह जानती थी कि उसकी दादी हमेशा उसके दिल में रहेंगी, और वह कभी अकेली नहीं होगी।

Emotional Story - दया का सागर

अंजली बड़ी होकर एक अच्छी लड़की बनी। वह हमेशा दूसरों की मदद करने के लिए तैयार रहती थी, और वह कभी नहीं भूली कि उसकी दादी ने उसके लिए क्या किया है।

अंजली की कहानी हमें सिखाती है कि भगवान हमेशा हमारे साथ हैं, और वह कभी अकेले नहीं हैं। यह हमें यह भी सिखाता है कि दूसरों की मदद करना महत्वपूर्ण है, और कि हम सभी एक दूसरे से जुड़े हुए हैं।

Leave a Comment