Class 2 Short Moral Stories in Hindi

(Class 2 Short Moral Stories in Hindi) कक्षा 2 की छोटी मोरल कहानियों का आनंद लें। इन प्रेरणादायक किस्सों के माध्यम से अपने बच्चे को मूल्यों का सार दें। इन प्यारी कहानियों के जरिए उन्हें ज्ञान, नैतिकता, और मनोरंजन की दुनिया में डालें। हिंदी में कक्षा 2 की कहानियों के साथ शिक्षा की यात्रा शुरू करें।

Class 2 Short Moral Stories in Hindi – ईमानदार किसान

Class 2 Short Moral Stories in Hindi - ईमानदार किसान

एक गाँव में एक गरीब किसान रहता था। वह बहुत ही ईमानदार और मेहनती था। उसकी पत्नी भी बहुत अच्छी और परोपकारी थी। उनके पास एक छोटा सा खेत था, जिस पर वह मेहनत करके अपना गुजारा चलाता था। एक दिन शाम के समय किसान अपने खेत में काम कर रहा था। अचानक उसकी नजर एक बटुए पर पड़ी। किसान ने बटुआ उठाया और खोला। उसमें बहुत सारे पैसे थे। किसान को लगा कि किसी ने यह बटुआ खो दिया होगा। उसने सोचा कि बटुए के मालिक को ढूँढना चाहिए।

किसान बटुआ लेकर गाँव में लोगों से पूछने लगा कि यह बटुआ किसका है। लेकिन कोई नहीं बता सका। किसान ने पूरे गाँव में बटुए के मालिक को ढूँढा, लेकिन कोई नहीं मिला। अंत में किसान ने गाँव के सरपंच के पास जाकर सारी बात बता दी। सरपंच ने बटुए को खोलकर पैसे गिने। उसमें हजार रुपये थे।

सरपंच ने बटुए में एक कागज रखा और उस पर अपना पता लिख दिया। अगले दिन सुबह से ही गांव के लोग सरपंच के घर के बाहर जमा हो गए। हर कोई सोच रहा था कि बटुए में क्या है। सरपंच ने बटुए को दिखाया और बताया कि किसान ने उसे ईमानदारी से लौटा दिया है। लोगों ने किसान की ईमानदारी की बहुत सराहना की।

सरपंच ने बटुए के मालिक को ढूँढने के लिए चिट्ठी छपवाकर गाँव में फैलवा दी। कुछ दिनों बाद एक आदमी सरपंच के घर आया और उसने बताया कि बटुआ उसका है। उस आदमी ने बताया कि वह एक व्यापारी है और वह रास्ते में उसका बटुआ गिर गया था। व्यापारी ने किसान को बहुत धन्यवाद दिया और उसे पैसे का ईनाम देने लगा। लेकिन किसान ने पैसे लेने से मना कर दिया। किसान ने कहा कि उसने ईमानदारी से बटुआ लौटा दिया था, इसलिए उसे कोई ईनाम नहीं चाहिए। व्यापारी बहुत प्रभावित हुआ और उसने किसान की ईमानदारी की फिर से सराहना की।

शिक्षा: ईमानदारी से हमेशा लाभ होता है। हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए।

Class 2 Short Moral Stories in Hindi – मेहनती चींटी

Class 2 Short Moral Stories in Hindi - मेहनती चींटी

एक जंगल में एक चींटी रहती थी। वह बहुत ही मेहनती और सावधान थी। चींटी अपने बच्चों के लिए हर रोज भोजन ढूँढने के लिए निकलती थी। वह रास्ते में जो भी मिलता था, उसे उठाकर अपने घर ले जाती थी। एक दिन चींटी को एक बड़ा सा सिक्का मिला। चींटी ने सोचा कि इसे अपने घर ले जाऊँगी। लेकिन सिक्का बहुत भारी था। चींटी ने सिक्के को घसीटकर ले जाना शुरू कर दिया।

रास्ते में उसे एक कछुआ मिला। कछुए ने पूछा कि चींटी कहाँ जा रही है। चींटी ने बताया कि वह एक बड़ा सा सिक्का लेकर अपने घर जा रही है। कछुए ने कहा कि इतना बड़ा सिक्का तुम अकेले कैसे ले जाओगी? चींटी ने कहा कि मैं कोशिश करूँगी। तुम चिंता मत करो।

चींटी फिर से सिक्के को घसीटकर ले जाने लगी। रास्ते में उसे एक बंदर मिला। बंदर ने पूछा कि चींटी क्या कर रही है। चींटी ने बताया कि वह एक बड़ा सा सिक्का लेकर अपने घर जा रही है। बंदर ने कहा कि इतना बड़ा सिक्का तुम अकेले कैसे ले जाओगी? चींटी ने कहा कि मैं कोशिश करूँगी। तुम चिंता मत करो। चींटी फिर से सिक्के को घसीटकर ले जाने लगी।

इस तरह से चींटी ने कई जानवरों से मदद माँगी, लेकिन सबने उसका मजाक उड़ाया और नमस्ते करके चले गए। चींटी ने हार नहीं मानी। वह पूरी मेहनत के साथ सिक्के को घसीटकर ले जाती रही। रास्ते में उसे एक हाथी मिला। हाथी ने पूछा कि चींटी क्या कर रही है। चींटी ने बताया कि वह एक बड़ा सा सिक्का लेकर अपने घर जा रही है। हाथी ने कहा कि इतना बड़ा सिक्का तुम अकेले कैसे ले जाओगी? चींटी ने कहा कि मैं कोशिश करूँगी। तुम चिंता मत करो। हाथी ने चींटी की मेहनत देखकर उसकी मदद करने का फैसला किया।

हाथी ने अपनी सूंड से सिक्के को उठा लिया और चींटी को अपने पीठ पर बैठा लिया। इस तरह से हाथी ने चींटी को उसके घर तक पहुँचा दिया। चींटी ने हाथी को बहुत धन्यवाद दिया। हाथी ने कहा कि उसे मदद करके बहुत खुशी हुई। चींटी अपने घर पहुँचकर बहुत खुश हुई। उसने सिक्के को अपने बच्चों को दिखाया। बच्चे भी बहुत खुश हुए। चींटी की मेहनत और सावधानी से उसने अपने बच्चों के लिए भोजन जुटा लिया था।

शिक्षा: मेहनत और सावधानी से हमेशा सफलता मिलती है। हमें हमेशा मेहनती और सावधान रहना चाहिए।

Class 2 Short Moral Stories in Hindi – सहायक बंदर

Class 2 Short Moral Stories in Hindi - सहायक बंदर

एक जंगल में एक बंदर रहता था। वह बहुत ही मजाकिया और मददगार था। बंदर को छोटे जानवरों से बहुत प्यार था। वह हमेशा उनकी मदद करने के लिए तैयार रहता था। एक दिन बंदर जंगल में घूम रहा था। अचानक उसकी नजर एक छोटे से खरगोश पर पड़ी। खरगोश एक पेड़ के नीचे फँसा हुआ था। वह पेड़ पर चढ़ने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह नहीं चढ़ पा रहा था। बंदर ने खरगोश की मदद करने का फैसला किया। बंदर पेड़ पर चढ़ गया और खरगोश को नीचे उतार लिया। खरगोश ने बंदर को बहुत धन्यवाद दिया। अगले दिन बंदर जंगल में घूम रहा था। अचानक उसकी नजर एक छोटे से हाथी पर पड़ी।

हाथी एक गड्ढे में गिर गया था। वह गड्ढे से बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वह नहीं निकल पा रहा था। बंदर ने हाथी की मदद करने का फैसला किया। बंदर ने हाथी को गड्ढे से बाहर निकालने के लिए एक रस्सी ढूँढी और उसे गड्ढे में फेंक दिया। हाथी ने रस्सी पकड़ ली और बंदर ने उसे रस्सी से खींचकर बाहर निकाल लिया। हाथी ने बंदर को बहुत धन्यवाद दिया। इस तरह से बंदर ने कई छोटे जानवरों की मदद की। छोटे जानवर बंदर का बहुत सम्मान करते थे। वे उसे ‘सहायक बंदर’ कहते थे।

शिक्षा: दूसरों की मदद करने से हमें बहुत खुशी मिलती है। हमें हमेशा दूसरों की मदद के लिए तैयार रहना चाहिए।

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