Any Moral Story In Hindi

Any Moral Story In Hindi

Any Moral Story In Hindi – किसान और सांप

Any Moral Story In Hindi - किसान और सांप

एक समय की बात है, एक गाँव में एक कठिन परिश्रमी किसान रहता था। वह अपने खेत में सुबह से शाम तक काम करता था और बहुत ही मेहनती और ईमानदार था।

एक दिन, जब वह अपने खेत में काम कर रहा था, तो उसने देखा कि एक बड़ा सांप उसके खेत में घायल होकर पड़ा है। सांप का एक पैर टूट गया था और वह बहुत दर्द में कराह रहा था।

किसान का दिल सांप के लिए पिघल गया। उसने साँप को पकड़ लिया और अपने घर ले गया। उसने सांप के घायल पैर की मरहम-पट्टी की और उसके लिए खाना-पानी का इंतज़ाम किया।

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किसान की पत्नी को डर था कि सांप उन्हें नुकसान पहुँचा देगा। लेकिन किसान ने उसे समझाया कि सांप को उनकी मदद की ज़रूरत है।

कुछ दिनों के बाद, सांप का पैर ठीक हो गया। वह किसान का बहुत आभारी था और उसने किसान से कहा, “मैं तुम्हारे इस उपकार को कभी नहीं भूलूँगा। मैं तुम्हारे लिए कुछ भी कर सकता हूँ।”

अगले दिन, किसान अपने खेत में काम कर रहा था। थोड़ी देर बाद, उसे एक भयंकर साँप-छिपकली की लड़ाई दिखाई दी। साँप-छिपकली लड़ रहे थे और किसान को लगा कि छिपकली को मार दिया जाएगा।

किसान ने याद किया कि साँप ने उसका उपकार किया है। उसने एक बड़ी सी लाठी उठाई और साँप की मदद करने के लिए दौड़ पड़ा।

किसान की मदद से साँप ने छिपकली को मार दिया। छिपकली बहुत ताकतवर थी और साँप उसे अकेले नहीं हरा सकता था।

साँप लड़ाई जीत गया और वह किसान के पास गया। उसने किसान को धन्यवाद दिया और कहा, “अब मैं तुम्हारा सबसे बड़ा मित्र हूँ।”

साँप किसान के खेत की रक्षा करने लगा। वह रात में खेत में घूमता रहता और चोरों और जानवरों को दूर भगा देता।

किसान बहुत खुश था कि साँप उसका मित्र है। वह साँप को दूध और अंडे देता था और उसका बहुत ध्यान रखता था।

किसान और साँप की मित्रता बहुत मजबूत थी। वे दोनों एक-दूसरे का सम्मान करते थे और एक-दूसरे पर भरोसा करते थे।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें हर किसी की मदद करनी चाहिए, चाहे वह इंसान हो या जानवर। अगर हम दूसरों की मदद करेंगे तो एक दिन वे भी हमारी मदद करेंगे।

Any Moral Story In Hindi – दयालु राजा और कबूतर

Any Moral Story In Hindi - दयालु राजा और कबूतर

एक बार की बात है, एक बड़े से राज्य में एक दयालु राजा रहता था। वह अपने प्रजा के प्रति बहुत ही उदार और दयालु था।

एक दिन, राजा अपने बगीचे में घूम रहा था। उसने देखा कि एक छोटा सा कबूतर जमीन पर गिर पड़ा है। कबूतर का एक पंख टूट गया था और वह उड़ नहीं सकता था।

राजा का दिल कबूतर के लिए पिघल गया। उसने कबूतर को पकड़ लिया और अपने महल में ले गया। उसने कबूतर के घायल पंख की मरहम-पट्टी की और उसके लिए खाना-पानी का इंतज़ाम किया।

कबूतर बहुत ही सुंदर और बुद्धिमान था। वह राजा से बहुत बातें करता था और राजा को उसके बताए किस्से बहुत पसंद थे।

कुछ दिनों के बाद, कबूतर का पंख ठीक हो गया। वह उड़ सकता था और वह राजा से बहुत मिलना चाहता था।

लेकिन कबूतर को पता था कि एक दिन उसे राजा को छोड़ना पड़ेगा। वह राजा से बहुत प्यार करता था और वह नहीं चाहता था कि राजा उससे दुखी हो जाए।

एक दिन, कबूतर राजा के पास गया। उसने राजा से कहा, “राजा, मैं आपका बहुत आभारी हूँ। आपने मेरी बहुत मदद की है। मुझे आपका साथ बहुत पसंद है। लेकिन अब मुझे जाना होगा।”

राजा बहुत दुखी था कि कबूतर जा रहा है। लेकिन वह जानता था कि कबूतर भी अपने घर जाना चाहता है।

राजा ने कबूतर को एक सोने का पिंजरा दिया और कहा, “यह तुम्हारे लिए मेरा तोहफा है। इसे अपने घर में रखना।”

कबूतर ने राजा को धन्यवाद दिया और वह उड़कर अपने घर चला गया।

कबूतर अपने घर में बहुत खुश था। उसने अपने साथियों को राजा की दयालुता के बारे में बताया। कबूतर के साथियों को राजा की कहानी बहुत पसंद आई और वे भी राजा से मिलने के लिए राज्य में आ गए।

राजा कबूतरों को देखकर बहुत खुश हुआ। उसने कबूतरों के लिए बगीचे में एक खास जगह बनाई। कबूतर उस जगह पर रहने लगे और वे राजा के साथ बहुत खुश थे।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें दयालु होना चाहिए और दूसरों की मदद करनी चाहिए। अगर हम दयालु होंगे तो लोग हमसे प्यार करेंगे और हमारा सम्मान करेंगे।

Any Moral Story In Hindi – कछुआ और खरगोश

Any Moral Story In Hindi - कछुआ और खरगोश

एक बार की बात है, एक जंगल में एक कछुआ और एक खरगोश रहते थे। वे दोनों बहुत अच्छे दोस्त थे।

कछुआ बहुत धीमा था, लेकिन वह बहुत ही मेहनती और बुद्धिमान था। खरगोश बहुत तेज था, लेकिन वह कभी-कभी बहुत घमंडी हो जाता था।

एक दिन, कछुआ और खरगोश एक साथ जंगल में घूम रहे थे। वे एक नदी के किनारे पहुँचे। नदी बहुत गहरी थी और खरगोश को तैरना नहीं आता था।

खरगोश कछुए से बोला, “कछुआ, मुझे नदी के पार ले जाओ।”

कछुआ ने कहा, “अच्छा, मैं तुम्हें नदी के पार ले जाऊँगा। लेकिन तुम एक बात का ध्यान रखना। तुम अपना घमंड छोड़ देना।”

खरगोश ने सहमति दे दी और कछुआ ने उसे अपनी पीठ पर ले लिया। कछुआ बहुत धीरे-धीरे तैर रहा था और खरगोश को बहुत गुस्सा आ रहा था।

खरगोश ने कहा, “कछुआ, तुम बहुत धीमे हो। मुझे जल्दी से पार करो।”

कछुआ ने कहा, “खरगोश, शांत रहो। मैं तुम्हें जल्दी से ही पार कर दूँगा।”

लेकिन खरगोश नहीं माना। वह कछुए की पीठ पर कूदने लगा और कछुआ का ध्यान भंग हो गया।

कछुआ का पैर फिसल गया और वह गिर गया। वह और खरगोश दोनों नदी में गिर गए।

खरगोश तैरना नहीं जानता था, इसलिए वह डूबने लगा। वह कछुए से बोला, “कछुआ, मुझे बचा लो!”

कछुआ ने खरगोश को अपनी पीठ पर ले लिया और उसे नदी के पार ले गया।

खरगोश कछुए का बहुत आभारी था। उसने कछुए से कहा, “कछुआ, मुझे माफ कर दो। मैं बहुत घमंडी हो गया था।”

कछुआ ने कहा, “कोई बात नहीं, खरगोश। तुमने सीख ली है कि घमंड करना अच्छा नहीं है।”

खरगोश और कछुआ फिर से अच्छे दोस्त बन गए। उन्होंने कभी भी घमंड नहीं किया और वे हमेशा एक-दूसरे की मदद करते थे।

Any Moral Story In Hindi – एक ईमानदार लकड़हारा और सोने की कुल्हाड़ी

Any Moral Story In Hindi - एक ईमानदार लकड़हारा और सोने की कुल्हाड़ी

एक बार की बात है, एक गरीब लकड़हारा था। वह हर रोज़ जंगल में जाकर लकड़ी काटता था और उन्हें बेचकर अपना गुजारा करता था।

एक दिन, जब वह लकड़ी काट रहा था, तो उसकी कुल्हाड़ी नदी में गिर गई। लकड़हारा बहुत दुखी हुआ क्योंकि उसकी कुल्हाड़ी बहुत पुरानी थी और वह उसे नहीं खरीद सकता था।

लकड़हारा नदी में कुल्हाड़ी ढूँढने लगा। वह नदी में बहुत गहरा तक गया, लेकिन उसे अपनी कुल्हाड़ी नहीं मिली।

जब वह हार मानकर वापस लौट रहा था, तो उसने नदी के किनारे पर एक चमकता हुआ सोने का टुकड़ा देखा। वह उस टुकड़े को उठाकर अच्छी तरह देखने लगा। वह सोने की कुल्हाड़ी थी!

लकड़हारा बहुत खुश हुआ। उसने सोने की कुल्हाड़ी को अपने घर ले जाया और उसे छिपा दिया। वह जानता था कि अगर वह लोगों को सोने की कुल्हाड़ी के बारे में बताएगा तो लोग उससे उसे छीन लेंगे।

अगले दिन, लकड़हारा फिर से जंगल में गया। वह लकड़ी काटने लगा तो उसकी कुल्हाड़ी टूट गई। वह बहुत दुखी हुआ क्योंकि अब उसके पास कोई कुल्हाड़ी नहीं थी।

लकड़हारा नदी के किनारे गया और वहाँ बैठकर रोने लगा। तभी अचानक एक देवता प्रकट हुआ। देवता ने लकड़हारे से पूछा, “तुम्हें क्या हो गया है?”

लकड़हारे ने देवता को बताया कि उसकी कुल्हाड़ी टूट गई है और अब वह लकड़ी नहीं काट सकता है। देवता ने कहा, “मैं तुम्हें एक नई कुल्हाड़ी दूँगा। लेकिन तुम मुझे वह सोने की कुल्हाड़ी दे दो जो तुम्हने नदी में पाया था।”

लकड़हारा सहमत हो गया। उसने देवता को सोने की कुल्हाड़ी दे दी और देवता ने उसे एक नई लोहे की कुल्हाड़ी दी। लकड़हारा बहुत खुश हुआ और वह देवता का धन्यवाद करके अपने घर चला गया।

लकड़हारा हर रोज़ लोहे की कुल्हाड़ी से लकड़ी काटकर अपना गुजारा करता था। वह बहुत ईमानदार था और वह कभी भी किसी का सामान नहीं चुराता था।

एक दिन, राजा को पता चला कि एक लकड़हारे के पास सोने की कुल्हाड़ी है। राजा ने लकड़हारे को बुलाकर उससे कहा, “मैं तुम्हें बहुत सारे पैसे दूँगा, अगर तुम मुझे सोने की कुल्हाड़ी दे दो।”

लकड़हारे ने कहा, “राजा, मैंने सोने की कुल्हाड़ी को एक देवता को दे दिया है।”

राजा ने लकड़हारे पर विश्वास नहीं किया। उसने लकड़हारे को जेल में डाल दिया।

लेकिन अगले दिन, लकड़हारा को जेल में एक सोने का टुकड़ा मिला। वह टुकड़ा सोने की कुल्हाड़ी का था!

लकड़हारा टुकड़े को लेकर राजा के पास गया। उसने राजा को बताया कि उसे जेल में सोने का टुकड़ा मिला है। राजा ने लकड़हारे को जेल से छोड़ा और उसे बहुत सारे पैसे दिए।

लकड़हारा बहुत खुश था। उसने अपने पैसे से एक छोटा सा घर खरीदा और सुख से रहने लगा। उसने कभी भी ईमानदारी नहीं छोड़ी।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें हमेशा ईमानदार रहना चाहिए। ईमानदारी से हमेशा अच्छा होता है और भगवान हमेशा ईमानदार लोगों की मदद करते हैं।

Any Moral Story In Hindi – कंजूस राजा और गरीब किसान

Any Moral Story In Hindi - कंजूस राजा और गरीब किसान

एक बार की बात है, एक बड़े राज्य में एक कंजूस राजा रहता था। वह अपने प्रजा के प्रति बहुत ही कंजूस था और वह हमेशा अपने भंडार में सोने के सिक्के जमा करता रहता था।

एक दिन, राजा अपने खेत में घूम रहा था। उसने देखा कि एक गरीब किसान अपने खेत में काम कर रहा है। किसान बहुत मेहनती था, लेकिन वह बहुत गरीब था।

राजा ने किसान से कहा, “किसान, तुम मुझे एक उपकार करो। मैं तुम्हें सोने का एक सिक्का दूँगा, अगर तुम मुझे अपने खेत में से तीन सबसे बड़े गाजर दे दो।”

किसान बहुत खुश हुआ। उसने राजा को अपने खेत में से तीन सबसे बड़े गाजर दिए और राजा ने उसे एक सोने का सिक्का दिया।

किसान को लगा कि वह बहुत बड़ा धंधा कर चुका है। वह सोने का सिक्का लेकर अपने घर चला गया।

अगले दिन, किसान फिर से अपने खेत में काम कर रहा था। तभी राजा फिर से उसके खेत में आया। उसने किसान से कहा, “किसान, तुम मुझे एक और उपकार करो। मैं तुम्हें सोने के दो सिक्के दूँगा, अगर तुम मुझे अपने खेत में से तीन सबसे छोटे गाजर दे दो।”

किसान सोचने लगा। वह जानता था कि राजा बहुत कंजूस है और वह कभी भी उसे एक मुफ्त का सिक्का नहीं देगा। लेकिन वह सोने के दो सिक्कों को भी मना नहीं कर सकता था।

Any Moral Story In Hindi - कंजूस राजा और गरीब किसान

किसान ने राजा को अपने खेत में से तीन सबसे छोटे गाजर दिए और राजा ने उसे सोने के दो सिक्के दिए।

किसान को लगा कि वह आज और भी बड़ा धंधा कर चुका है। वह सोने के दो सिक्कों को लेकर अपने घर चला गया।

अब किसान के पास तीन सोने के सिक्के थे। वह बहुत खुश था। वह सोचने लगा कि अब वह गरीब नहीं रहेगा।

लेकिन अगले दिन, जब किसान अपने खेत में काम कर रहा था, तो राजा फिर से उसके खेत में आया। उसने किसान से कहा, “किसान, तुम मुझे एक और उपकार करो। मैं तुम्हें सोने के तीन सिक्के दूँगा, अगर तुम मुझे अपने खेत में से तीन सबसे मध्यम आकार के गाजर दे दो।”

किसान को पता था कि राजा बहुत ही चालाक है। वह जानता था कि राजा उसे सोने के तीन सिक्के नहीं देगा। लेकिन वह सोने के तीन सिक्कों को भी मना नहीं कर सकता था।

किसान ने राजा को अपने खेत में से तीन सबसे मध्यम आकार के गाजर दिए। लेकिन राजा ने उसे कोई सोने का सिक्का नहीं दिया।

राजा ने कहा, “किसान, तुमने मुझे तीन सबसे बड़े गाजर दिए थे, तो मैंने तुम्हें एक सोने का सिक्का दिया था। तुमने मुझे तीन सबसे छोटे गाजर दिए थे, तो मैंने तुम्हें दो सोने के सिक्के दिए थे। लेकिन आज तुमने मुझे तीन सबसे मध्यम आकार के गाजर दिए हैं, इसलिए मैं तुम्हें कोई सोने का सिक्का नहीं दूँगा।”

किसान बहुत गुस्से में था। उसने राजा को गाजर फेंक दिए और अपने घर चला गया।

किसान ने समझ लिया कि राजा बहुत ही कंजूस है और वह कभी भी किसी की मदद नहीं करेगा। उसने अपनी गरीबी में ही रहने का फैसला किया।

यह कहानी हमें सिखाती है कि हमें कभी भी किसी से ज्यादा की उम्मीद नहीं रखनी चाहिए। हमें अपने काम में मेहनत करनी चाहिए और ईमानदारी से जीना चाहिए।

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