स्वर्ग की सीढ़ी और कारीगरों का सवाल | Swarg Ki Seedhi Story in Hindi

स्वर्ग की सीढ़ी और कारीगरों का सवाल | Swarg Ki Seedhi Story in Hindi

कहानी का सार (Quick Summary):
‘स्वर्ग की सीढ़ी’ असंभव मांगों को बुद्धिमानी से टालने की एक क्लासिक अकबर-बीरबल कथा है। दरबारी षड्यंत्रकारियों ने अकबर के कान भरकर बीरबल को ऐसी चुनौती दिलवाई जिसे कोई इंसान पूरा नहीं कर सकता था—’ज़मीन से लेकर स्वर्ग तक एक सीढ़ी का निर्माण करना’। बीरबल ने पतंगों और बच्चों की मदद से ऐसा नाटक रचा कि बादशाह को खुद अपनी मांग वापस लेनी पड़ी।

दरबारियों का षड्यंत्र और असंभव सीढ़ी

बीरबल के विरोधी दरबारी हर समय ऐसी योजनाओं की ताक में रहते थे जिससे बीरबल बादशाह की नज़रों में गिर जाएं। एक दिन दरबारियों ने अकबर से कहा—

“जहाँपनाह! आप दुनिया के सबसे महान शहंशाह हैं। आपके पास सब कुछ है, लेकिन आपके पास सीधे जन्नत (स्वर्ग) जाने का कोई रास्ता नहीं है। क्यों न बीरबल जी से कहकर ज़मीन से लेकर सीधे स्वर्ग के दरवाज़े तक एक सीढ़ी बनवाई जाए? बीरबल के लिए तो कुछ भी असंभव नहीं है!”

अकबर अपनी शान के मद में आ गए। उन्होंने बीरबल को बुलाया और हुक्म दिया— “बीरबल! हम चाहते हैं कि तुम हमारे लिए स्वर्ग तक जाने वाली एक मजबूत सीढ़ी बनवाओ, ताकि हम जब चाहें स्वर्ग जाकर सैर कर सकें। तुम्हें इसके लिए एक महीने का समय दिया जाता है!”

बीरबल की हामी और पतंगों का खेल

बीरबल समझ गए कि यह दरबारियों का बिछाया हुआ जाल है। उन्होंने सिर झुकाकर कहा— “हुजूर! जैसी आपकी मर्जी। सीढ़ी ज़रूर बनेगी, बस मुझे कुछ कारीगरों और सामान का प्रबंध करने दीजिए।”

बीरबल ने शहर के सबसे बेहतरीन पतंगसाज़ों को बुलाया। उन्होंने बहुत बड़ी-बड़ी मजबूत रेशमी पतंगें बनवाईं। उन पतंगों की डोर में उन्होंने घंटियां और झांझर बांध दिए।

महीना बीतने पर जब रात को आसमान में तेज हवा चल रही थी, बीरबल ने कुछ होशियार लड़कों को उन बड़ी पतंगों की डोर देकर दूर टीलों पर भेज दिया और पतंगों को बादलों की ऊंचाई तक उड़वा दिया।

आसमान से आती आवाजें और अकबर का कौतूहल

आधी रात को जब हवा चली, तो बादलों में उड़ती पतंगों की घंटियां बजने लगीं— “झन-झन-झन…” साथ ही बीरबल के सिखाए अनुसार लड़के बांस की नलियों से ऊपर की तरफ मुंह करके चिल्लाने लगे— “ईंट लाओ! चूना लाओ! हथौड़ा लाओ! सीढ़ी की नींव रखो!”

अकबर अपने महल की छत पर टहल रहे थे। जब उन्होंने आसमान से घंटियों की गूंज और कारीगरों के चिल्लाने की आवाजें सुनीं, तो वे हैरान रह गए!

सुबह होते ही अकबर ने बीरबल को तलब किया— “बीरबल! रात को आसमान से हथौड़ों और ईंट-चूने की आवाजें क्यों आ रही थीं?”

बीरबल की मांग और दरबारियों की बोलती बंद

बीरबल ने हाथ जोड़कर बड़ी संजीदगी से कहा—

“जहाँपनाह! मुबारक हो! स्वर्ग के कारीगरों ने ऊपर स्वर्ग के दरवाजे से नीचे की तरफ सीढ़ी बनानी शुरू कर दी है! रात को जो आवाजें आ रही थीं, वे स्वर्ग के राजमिस्त्रियों की ही थीं!

लेकिन हुजूर, एक बहुत बड़ी अड़चन आ गई है। स्वर्ग के कारीगरों का कहना है कि वे ऊपर से सीढ़ी तभी जोड़ पाएंगे जब नीचे ज़मीन से कोई कारीगर ऊपर जाकर सीढ़ी की नींव का सहारा पकड़ेगा!

इसलिए जहाँपनाह! जिन दरबारियों ने इस सीढ़ी का विचार दिया था, उन सबको तुरंत ऊपर आसमान में भेजा जाए ताकि वे ऊपर जाकर कारीगरों को ईंट और चूना पकड़ा सकें!”

अकबर का ठहाका और दरबारियों का पसीना

यह सुनते ही उन षड्यंत्रकारी मंत्रियों की सांसें अटक गईं! भला ज़मीन से आसमान में उड़कर ईंट-चूना कौन पकड़ा सकता था?

अकबर मंत्रियों के उतरे हुए चेहरे देखकर सब समझ गए। अकबर ने पेट पकड़कर हंसते हुए कहा—

“वाह बीरबल! तुमने आसमान में सीढ़ी भी बनवा दी और इन मूर्ख दरबारियों को स्वर्ग की सैर कराने का रास्ता भी निकाल दिया!”

अकबर ने अपनी मांग वापस ली और उन मंत्रियों को डांटकर भगाया।


कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • असंभव मांग का तार्किक तोड़: यदि कोई आप पर कोई असंभव काम थोपे, तो उसी के तर्ज पर एक ऐसा पूरक काम मांगिए जिसे वह खुद न कर सके।
  • ईर्ष्या हमेशा मुंह की खाती है: दूसरों को नीचा दिखाने के चक्कर में इंसान खुद हास्य का पात्र बन जाता है।
  • बुद्धिमान हर परिस्थिति का स्वामी होता है: बीरबल ने पतंगों की मदद से ऐसा भ्रम रचा जिसने विरोधियों के होश उड़ा दिए।

अकबर-बीरबल की अन्य प्रसिद्ध कहानियां पढ़ें:

Advertisement

1 thought on “स्वर्ग की सीढ़ी और कारीगरों का सवाल | Swarg Ki Seedhi Story in Hindi”

Leave a Comment