किसका बच्चा सबसे सुंदर? | Kiska Bachha Sabse Sundar Akbar Birbal Story in Hindi
‘किसका बच्चा सबसे सुंदर?’ माँ के निस्वार्थ प्रेम और वात्सल्य को समर्पित अकबर-बीरबल की सबसे भावुक कहानियों में से एक है। अकबर को अपने शहजादे की सुंदरता पर बहुत नाज था। बीरबल ने तर्क दिया कि दुनिया की हर माँ के लिए उसका अपना बच्चा ही दुनिया में सबसे सुंदर होता है। इसे साबित करने के लिए बीरबल ने अकबर को एक ऐसी माँ से मिलवाया, जिसने बादशाह की आँखें नम कर दीं।
शहजादे का रूप और अकबर का अभिमान
शहंशाह अकबर के महल में नन्हे शहजादे खुर्रम खेल रहे थे। गोरा रंग, कजरारी आँखें, रेशमी बाल और शाही लिबास में सजे शहजादे को देखकर अकबर का सीना गर्व से चौड़ा हो गया।
अकबर ने पास खड़े बीरबल से मुस्कुराते हुए कहा— “बीरबल! ज़रा हमारे शहजादे को देखो। क्या तुम्हें लगता है कि पूरी दुनिया में इससे ज्यादा सुंदर और मनमोहक बच्चा कोई दूसरा हो सकता है?”
बीरबल ने हाथ जोड़कर कहा— “जहाँपनाह, शहजादा साहब बेशक बहुत सुंदर और प्यारे हैं। लेकिन इस कायनात का दस्तूर यह है कि दुनिया की हर माँ के लिए उसका अपना ही बच्चा सबसे ज्यादा खूबसूरत और अनमोल होता है।”
अकबर को यह बात हजम नहीं हुई। वे बोले— “बीरबल, तुम भी हद करते हो! क्या एक गरीब, मैले-कुचैले या बदसूरत बच्चे की तुलना हमारे शहजादे से हो सकती है? तुम हमारी बात को हमेशा गलत साबित करने की कोशिश करते हो।”
बीरबल ने कहा— “हुजूर, अगर आपको मेरी बात पर ऐतबार नहीं, तो भेष बदलकर नगर में चलिए और खुद अपनी आँखों से देख लीजिए।”
नगर भ्रमण और मिट्टी में खेलता बालक
अकबर और बीरबल ने साधारण नागरिकों का भेष बनाया और आगरा की गलियों में निकल पड़े। बीरबल अकबर को शहर के सबसे गरीब और उपेक्षित इलाके की एक कच्ची बस्ती में ले गए।
वहां एक टूटी-फूटी झोपड़ी के बाहर एक गरीब महिला ज़मीन पर बैठकर पुराने कपड़े सिल रही थी। उसके पास ही ज़मीन की धूल और कीचड़ में उसका छोटा सा बच्चा खेल रहा था।
बच्चा बिल्कुल दुबला-पतला था, उसका रंग गहरा सांवला था, नाक बह रही थी और पूरा शरीर मिट्टी से सना हुआ था। दिखने में वह बच्चा किसी भी तरह से सुंदर नहीं कहा जा सकता था।
अकबर ने नाक सिकोड़ते हुए बीरबल से फुसफुसाकर कहा— “बीरबल! तुम मुझे यहाँ कहाँ ले आए? देखो उस बच्चे को, कितना मैला और बदसूरत है! भला इसे कौन सुंदर कहेगा?”
बीरबल ने कहा— “हुजूर! ज़रा दो मिनट तमाशा देखिए।”
माँ की ममता का अद्भुत नज़ारा
बीरबल उस झोपड़ी के पास गए और उस महिला से बोले— “माई! हम दूर देश से आए सौदागर हैं। हमारे राजा को एक बेहद सुंदर बच्चे की तलाश है जिसे वे सोने के पालने में झुलाएंगे और उसकी माँ को 5000 सोने की मोहरें देंगे। क्या तुम अपने इस बच्चे को हमें बेचोगी? और वैसे भी, यह बच्चा दिखने में तो बहुत साधारण है, तुम्हें इसके बदले इतना धन मिल जाएगा कि तुम्हारी सात पीढ़ियां खाएंगी!”
यह सुनते ही वह गरीब माँ बिजली की तरह तड़पकर उठी! उसने एक पल की भी देरी किए बिना दौड़कर अपने उस मिट्टी से सने बच्चे को अपनी छाती से चिपका लिया।
उसने बच्चे के चेहरे की धूल को अपने आंचल से पोछा, उसके माथे को चूमा और गुस्से से कांपते हुए बोली—
“खबरदार सौदागर! अगर मेरे लाल की तरफ आँख भी उठाई! तुम्हारी सारी दौलत मेरे इस चांद के टुकड़े की एक मुस्कान पर कुर्बान है! दुनिया में इससे ज्यादा सुंदर, इससे ज्यादा प्यारा और अनमोल बच्चा कोई हो ही नहीं सकता! निकल जाओ यहाँ से, वरना मैं अपनी जान दे दूँगी पर अपने कलेजे के टुकड़े को किसी को नहीं छूने दूँगी!”
उस माँ की आँखों में ममता के आंसू छलक रहे थे और वह अपने बच्चे को ऐसे दुलार रही थी मानो उसके हाथों में दुनिया का सबसे नायाब कोहिनूर हीरा हो!
अकबर की आँखें नम और बीरबल की सीख
उस गरीब माँ का यह निस्वार्थ और बेइंतहा प्यार देखकर शहंशाह अकबर का सारा राजसी घमंड चकनाचूर हो गया। उनकी आँखों में पानी भर आया।
अकबर चुपचाप उस बस्ती से बाहर आए और बीरबल से बोले—
“बीरबल! आज तुमने मेरी आँखें खोल दीं। सुंदरता चेहरे के रंग-रूप या रेशमी कपड़ों में नहीं होती, सुंदरता तो देखने वाले की आँखों और प्यार करने वाले के दिल में होती है। उस माँ के लिए उसका सांवला और मिट्टी में सना बच्चा दुनिया के किसी भी शहजादे से लाख गुना बढ़कर है।”
अकबर ने बिना अपनी पहचान बताए, उस गरीब माँ की झोपड़ी में चुपके से सोने की मोहरें भिजवा दीं ताकि उस बच्चे का भविष्य संवर सके।
कहानी से सीख (Moral of the Story):
- ममता से बड़ा कोई आभूषण नहीं: माँ का प्यार रंग, रूप, गरीबी या अमीरी का मोहताज नहीं होता। एक माँ के लिए उसकी संतान हमेशा दुनिया की सबसे खूबसूरत रचना होती है।
- सुंदरता देखने वाले की नज़र में होती है: बाहरी रंग-रूप समय के साथ ढल जाता है, लेकिन जो प्रेम और पवित्रता दिल में होती है, वही सच्चा सौंदर्य है।
- किसी के रूप का मज़ाक न उड़ाएं: ईश्वर की बनाई किसी भी रचना को बदसूरत समझने का हक किसी इंसान को नहीं है।
अकबर-बीरबल की अन्य प्रसिद्ध कहानियां पढ़ें: