अंधों की गिनती: बीरबल की अनोखी सूची | Andhon Ki Ginti Akbar Birbal Story in Hindi

अकबर-बीरबल: अंधों की गिनती की मजेदार कहानी | Andhon Ki Ginti Story in Hindi

कहानी का सार (Quick Summary):
‘अंधों की गिनती’ बीरबल की सबसे मजेदार और व्यंग्यात्मक कहानियों में से एक है। अकबर ने सवाल किया कि राज्य में आँख वाले ज्यादा हैं या अंधे? बीरबल ने भरी सड़क पर जूता सिलने का नाटक करके एक ऐसी सूची बनाई, जिसमें अकबर का नाम भी अंधों की लिस्ट में सबसे ऊपर आ गया! यह कहानी सिखाती है कि खुली आँखों से भी लोग अक्सर अनदेखा कर देते हैं।

दरबार की बहस: आँख वाले ज्यादा या अंधे?

एक दिन बादशाह अकबर और बीरबल दरबार में राज्य की जनता के सुख-दुख पर चर्चा कर रहे थे। बातों-बातों में अकबर ने कहा— “बीरबल! हमारे राज्य में दान-पुण्य बहुत होता है। हम चाहते हैं कि राज्य के सभी नेत्रहीनों (अंधों) की एक सूची बनाई जाए ताकि उन्हें शाही खजाने से पेंशन और राशन दिया जा सके।”

बीरबल ने सिर हिलाकर कहा— “जहाँपनाह! यह तो बहुत नेक ख्याल है। लेकिन मेरा मानना है कि हमारे राज्य में अंधों की तादाद आँखों वालों से कहीं ज्यादा है!”

अकबर चौंक गए और हंसे— “क्या पागलपन है बीरबल! भला अंधे लोग देखने वालों से ज्यादा कैसे हो सकते हैं? तुम हमेशा उल्टी बात करते हो!”

बीरबल ने कहा— “हुजूर, अगर आपको यकीन न हो तो मुझे दो दिन की मोहलत दीजिए। मैं आपको अंधों और आँखों वालों दोनों की सूची बनाकर दिखा दूँगा।”

अकबर ने चुनौती स्वीकार कर ली— “ठीक है, साबित करके दिखाओ।”

आगरा के मुख्य चौराहे पर बीरबल का मोची अवतार

अगले दिन सुबह-सुबह बीरबल आगरा के सबसे व्यस्त चौराहे के बीचों-बीच एक चटाई बिछाकर बैठ गए। उनके सामने चमड़ा, धागा, सुई और एक पुराना जूता रखा था। बीरबल बड़े ध्यान से जूता सिलने का नाटक करने लगे।

उनके बगल में एक मुंशी कलम-दवात और एक लंबा कागज़ लेकर बैठा था।

चौराहे से गुजरते हुए एक दरबारी ने बीरबल को इस हाल में देखा तो उसकी आँखें फटी रह गईं। वह दौड़कर आया और बोला— “अरे बीरबल जी! आप यहाँ ज़मीन पर बैठकर क्या कर रहे हैं? क्या जूता सिल रहे हैं?”

बीरबल ने कोई जवाब नहीं दिया, बस मुंशी की तरफ इशारा किया— “मुंशी जी, इनका नाम अंधों की लिस्ट में दर्ज कर लो!”

दरबारी गुस्से में बोला— “अरे मैं अंधा कहाँ हूँ? मैं तो अपनी आँखों से देख रहा हूँ!” लेकिन बीरबल ने उसकी तरफ ध्यान नहीं दिया और जूता सिलते रहे।

सैकड़ों नाम और अंधों की लंबी फेहरिस्त

दिन चढ़ता गया। जो कोई भी उस रास्ते से निकलता—चाहे वह व्यापारी हो, फौजी हो, नौकर हो या कोई बड़ा अमीर—बीरबल को जूता सिलते देखकर वही सवाल पूछता— “अरे बीरबल साहब! आप यह क्या कर रहे हैं?”

और बीरबल हर बार मुंशी से कहते— “मुंशी जी, एक और नाम अंधों की सूची में जोड़ लो!”

शाम होते-होते अंधों की सूची का पन्ना भर गया और दूसरा पन्ना शुरू हो गया। शहर भर में खबर फैल गई कि बीरबल का दिमाग खराब हो गया है और वे चौराहे पर बैठकर जूते सिल रहे हैं और लोगों को अंधा कह रहे हैं!

अकबर की एंट्री और लिस्ट का पहला नाम

जब यह खबर महल तक पहुंची, तो बादशाह अकबर से रहा नहीं गया। वे खुद अपने लाव-लश्कर के साथ चौराहे पर पहुंचे।

अकबर ने देखा कि बीरबल पसीने से तर-बतर होकर बड़ी तन्मयता से जूता टांक रहे हैं। अकबर घोड़े से उतरे, पास आए और हैरानी से बोले—

“बीरबल! यह तुम क्या तमाशा कर रहे हो? क्या तुम जूता सिल रहे हो?”

बीरबल ने तुरंत सिर उठाया और मुंशी से कहा—

“मुंशी जी! रुकिए मत, जहाँपनाह बादशाह सलामत का नाम अंधों की सूची में सबसे ऊपर लिख लीजिए!”

यह सुनते ही अकबर भौचक्के रह गए! वे बोले— “बीरबल! तुम्हारी यह मजाल? तुम हिंदुस्तान के शहंशाह को अंधा कह रहे हो? क्या तुम्हें मेरी आँखें नजर नहीं आतीं?”

बीरबल की सटीक दलील और अकबर की हंसी

बीरबल ने हाथ जोड़कर बड़ी नरमी से कहा—

“माफ कीजिए जहाँपनाह! आपकी दोनों आँखें बिल्कुल सलामत हैं… लेकिन जब आप खुद अपनी आँखों से देख रहे हैं कि मैं हाथ में सुई-धागा लेकर जूता सिल रहा हूँ, फिर भी आप मुझसे पूछ रहे हैं कि ‘क्या तुम जूता सिल रहे हो?’

हुजूर! जो इंसान अपनी आँखों के सामने घट रही साफ घटना को देखकर भी वही सवाल पूछे, तो उसे आँखों वाला कैसे कहा जा सकता है? ऐसे लोग तो आँखें होते हुए भी अंधे हैं ना!”

बीरबल ने आगे कहा— “हुजूर, सुबह से सैकड़ों लोग मुझे जूता सिलते देखकर यही बेतुका सवाल पूछ चुके हैं। इसलिए अंधों की लिस्ट तो भर गई, पर जो लोग समझदारी से चुपचाप निकल गए, उनकी सूची में एक भी नाम नहीं आया!”

अकबर को बीरबल का यह हास्य और व्यंग्य इतना सटीक लगा कि वे चौराहे पर ही पेट पकड़कर हंसने लगे। पूरे दरबारियों की बोलती बंद हो चुकी थी।


कहानी से सीख (Moral of the Story):

  • आँखें होना और देखना दो अलग बातें हैं: कई बार इंसान के पास दृष्टि (Eyesight) होती है, लेकिन दृष्टिकोण (Vision) और समझदारी नहीं होती। जो साफ दिख रहा हो, उस पर बेवजह सवाल नहीं करना चाहिए।
  • जागरूक बनिए: समाज में बहुत से लोग आँखें होते हुए भी सच और सच्चाई को देखने से कतराते हैं। सच्चा इंसान वही है जो विवेक से काम ले।
  • हाजिरजवाबी का हुनर: बीरबल ने बिना किसी को अपमानित किए, हंसी-मजाक में ही एक बहुत बड़ा सामाजिक सबक सिखा दिया।

अकबर-बीरबल की अन्य प्रसिद्ध कहानियां पढ़ें:

Advertisement

2 thoughts on “अंधों की गिनती: बीरबल की अनोखी सूची | Andhon Ki Ginti Akbar Birbal Story in Hindi”

Leave a Comment