एक संत नदी में स्नान कर रहे थे। उन्होंने देखा कि एक बिच्छू पानी में डूब रहा है। संत ने उसे हथेली पर उठाकर किनारे रखने की कोशिश की। बिच्छू ने तुरंत संत के हाथ पर डंक मार दिया। दर्द के कारण बिच्छू फिर पानी में गिर गया।
संत ने दोबारा बिच्छू को उठाया। बिच्छू ने फिर डंक मारा। पास खड़े शिष्य ने कहा, “गुरुदेव! आप इस दुष्ट बिच्छू को क्यों बचा रहे हैं? यह बार-बार आपको ही डंक मार रहा है।”
संत ने मुस्कुराते हुए कहा, “वत्स! डंक मारना बिच्छू का स्वभाव है, और बचाना मेरा स्वभाव है। जब एक छोटा सा कीट अपनी बुराई नहीं छोड़ रहा, तो मैं एक संन्यासी होकर अपनी अच्छाई और करुणा क्यों छोड़ दूँ?”
💡 सीख: दुनिया आपके साथ कैसा भी व्यवहार करे, आप अपनी अच्छाई और संस्कारों को कभी मत छोड़िए।