खोजता रहा जिसे तू मंदिरों और मजारों में,
वो सुकून छुपा बैठा है तेरे ही अंतर्मन के किनारों में।आंखें बंद कर और सुन इस मौन की सदा,
धुल जाएगी तेरे हर भ्रम की व्यथा।
तू ही ज्योति है, तू ही अनंत प्रकाश है,
पहचान खुद को, ईश्वर तेरे ही पास है!
खोजता रहा जिसे तू मंदिरों और मजारों में,
वो सुकून छुपा बैठा है तेरे ही अंतर्मन के किनारों में।आंखें बंद कर और सुन इस मौन की सदा,
धुल जाएगी तेरे हर भ्रम की व्यथा।
तू ही ज्योति है, तू ही अनंत प्रकाश है,
पहचान खुद को, ईश्वर तेरे ही पास है!