एक तालाब में तीन मछलियां रहती थीं—अनागतविधाता (दूरदर्शी), प्रत्युत्पन्नमति (बुद्धिमान) और यद्भविष्य (भाग्यवादी)। जब मछुआरों ने जाल डालने की बात की, तो पहली मछली उसी रात नहर से दूसरे सुरक्षित तालाब में चली गई।
दूसरी मछली ने जाल में फंसते ही मरने का नाटक किया और मछुआरे ने उसे मरा समझकर पानी के पास फेंका तो वह छलांग लगाकर गहरे पानी में भाग गई। लेकिन तीसरी मछली, जो भाग्य के भरोसे बैठी थी कि “जो होगा देखा जाएगा”, जाल में फंसी और मारी गई।
💡 सीख: केवल भाग्य के भरोसे हाथ पर हाथ रखकर बैठने वाले नष्ट हो जाते हैं; जो समय से पहले संकट को भांपकर तैयारी करते हैं, वे हमेशा सुरक्षित रहते हैं।