एक बूढ़े किसान के चार बेटे थे जो कोई काम नहीं करते थे। मरते समय किसान ने बेटों को बुलाया और कहा, “मेरे बच्चों! मैंने अपने खेत में एक बड़ा खजाना गाड़ कर रखा है। मेरे मरने के बाद उसे खोद लेना।”
पिता के मरने के बाद चारों बेटों ने खजाने के लालच में पूरा खेत कोने-कोने तक खोद डाला। लेकिन खजाना कहीं नहीं मिला। तभी वर्षा ऋतु आ गई। मां ने कहा, “खेत तो खुद ही चुका है, इसमें अनाज के बीज बो दो।”
बेटों ने बीज बो दिए। खेत इतनी अच्छी तरह खुदा था कि उस साल रिकॉर्ड तोड़ बंपर फसल हुई! फसल बेचकर उन्हें ढेर सारा धन मिला। तब उन्हें समझ आया कि पिता किस गुप्त खजाने की बात कर रहे थे—वह खजाना उनकी खुद की मेहनत थी!
💡 सीख: मेहनत से कमाए गए धन से बड़ा कोई खजाना इस दुनिया में नहीं है। परिश्रम ही दरिद्रता को दूर भगाता है।