एक कुम्हार मिट्टी से चिलम बना रहा था। उसने चिलम को आकार दे दिया था। तभी उसकी पत्नी ने कहा, “यह क्या बना रहे हो? गर्मियां आने वाली हैं, चिलम के बजाय सुराही बनाओ, खूब बिकेगी।”
कुम्हार ने चिलम को तोड़कर फिर से मिट्टी गूंथी और एक सुंदर सुराही बना दी। मिट्टी से अचानक एक आवाज आई, “अरे कुम्हार! पहले तू मुझे चिलम बना रहा था, अब सुराही क्यों बना दी?”
कुम्हार ने कहा, “मेरा विचार बदल गया!”
मिट्टी ने मुस्कुरा कर कहा: “तुम्हारा तो सिर्फ विचार बदला, मगर मेरी तो पूरी जिंदगी ही बदल गई! अगर मैं चिलम बनती तो खुद भी जलती और दूसरों को भी जलाती; अब सुराही बन गई हूँ, तो खुद भी शीतल रहूँगी और दूसरों को भी ठंडा जल पिलाकर तृप्त करूँगी!”
💡 सीख: जब आपकी सोच दूसरों को सुख पहुँचाने की होती है, तो आपका अपना जीवन भी शांति और शीतलता से भर जाता है।