संघर्षों का गीत: तू चलता चल | Song of Perseverance Hindi Poem

धूप हो या छांव हो, तू चलता चल,
राह में गहरा घाव हो, तू चलता चल।

गिरना ही तो नियति है हर मुसाफिर की कभी,
गिर के जो संभल गया, वही सिकंदर बना अभी।
मत पूछ दिशाओं से कि मंजिल कितनी दूर है,
तेरा हर बढ़ता कदम ही तेरी विजय का नूर है!

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