तपती हुई धरती पे जब पहली बूंद गिरी,
मिट्टी की सौंधी महक से हवाएं संवरी।झूम उठे पेड़-पौधे, नाचे मयूर वन में,
एक अनोखा सा सुकून घुल गया इस तन-मन में।
धुल गए सब गिले-शिकवे इस रिमझिम फुहार से,
कुदरत ने सजाया चमन नए प्यार से!
तपती हुई धरती पे जब पहली बूंद गिरी,
मिट्टी की सौंधी महक से हवाएं संवरी।झूम उठे पेड़-पौधे, नाचे मयूर वन में,
एक अनोखा सा सुकून घुल गया इस तन-मन में।
धुल गए सब गिले-शिकवे इस रिमझिम फुहार से,
कुदरत ने सजाया चमन नए प्यार से!