न कोई सीमा, न कोई पहरा,
हवा का झोंका कितना गहरा।
पत्तों को छूकर गाती है जो,
खुशियों का संदेशा लाती है जो।
तू भी जी खुलकर इस जीवन को,
खोल दे अपने अंतर्मन को!
न कोई सीमा, न कोई पहरा,
हवा का झोंका कितना गहरा।
पत्तों को छूकर गाती है जो,
खुशियों का संदेशा लाती है जो।
तू भी जी खुलकर इस जीवन को,
खोल दे अपने अंतर्मन को!