बहती हवा और आजादी: प्रकृति के उन्मुक्त सौंदर्य पर कविता | Freedom and Nature Poem in Hindi

न कोई सीमा, न कोई पहरा,
हवा का झोंका कितना गहरा।
पत्तों को छूकर गाती है जो,
खुशियों का संदेशा लाती है जो।
तू भी जी खुलकर इस जीवन को,
खोल दे अपने अंतर्मन को!

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