पथिक! विश्राम न कर: निरंतर चलते रहने की प्रेरणादायक कविता | Pathik Hindi Poem on Life

पथिक! विश्राम न कर तू अभी,
मंजिल अभी दूर खड़ी है।
रास्तों के कांटों से डर मत,
यह इम्तिहान की घड़ी है।

सूरज भी ढलता है रोज़ाना,
पर सुबह फिर जगमगाता है।
जो पसीना बहाता है धूप में,
वही इतिहास रचाता है।
चलते रहना ही जीवन का नाम है,
रुक जाना तो केवल मृत्यु का पैगाम है!

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