श्रीमद्भगवद्गीता के 50+ अनमोल विचार | Bhagavad Gita Quotes in Hindi on Life & Karma
श्रीमद्भगवद्गीता महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा अर्जुन को दिया गया दिव्य ज्ञान है। इसका केंद्रीय दर्शन ‘निष्काम कर्म योग’ है—अर्थात फल की इच्छा किए बिना अपने कर्तव्य का पूरी निष्ठा से पालन करना, मन पर नियंत्रण रखना और ईश्वर के प्रति शरणागति स्थापित करना।
कर्म और कर्तव्य पर गीता के प्रेरक उपदेश (Karma Quotes from Gita)
श्रीकृष्ण कहते हैं कि मनुष्य केवल अपने कर्म का अधिकारी है, उसके फल का नहीं। जब मनुष्य फल की चिंता छोड़कर कर्म में लीन हो जाता है, तभी उसे सच्ची मानसिक शांति और सफलता प्राप्त होती है:
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन।
मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
अर्थ: तेरा कर्म करने में ही अधिकार है, उसके फलों में कभी नहीं। इसलिए कर्म के फल की इच्छा मत कर और न ही कर्म त्यागने का विचार मन में ला।”
“जो हुआ वह अच्छा हुआ, जो हो रहा है वह अच्छा हो रहा है, जो होगा वह भी अच्छा ही होगा। तुम भविष्य की व्यर्थ चिंता क्यों करते हो?”
“परिवर्तन संसार का अटल नियम है। जिसे तुम मृत्यु समझते हो, वह वास्तव में एक नए जीवन का आरंभ है।”
“मन अशांत हो तो यह व्यक्ति का सबसे बड़ा शत्रु बन जाता है, और यदि मन वश में हो तो यह सबसे उत्तम मित्र है।”
“न तो यह शरीर तुम्हारा है, न तुम शरीर के हो। यह शरीर पंचतत्व से बना है और उसी में विलीन हो जाएगा, आत्मा अमर है।”
जीवन, क्रोध और मोह पर श्रीकृष्ण के विचार (Life & Mind Control)
“क्रोध से भ्रम उत्पन्न होता है, भ्रम से बुद्धि भ्रष्ट होती है, और बुद्धि नष्ट होने पर मनुष्य का सर्वनाश हो जाता है।”
“संदेह करने वाले मनुष्य के लिए न तो इस लोक में सुख है और न ही परलोक में। विश्वास ही जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है।”
“मनुष्य अपने विश्वास से निर्मित होता है। जैसा वह विश्वास करता है, अंततः वैसा ही वह बन जाता है।”
“जब परिस्थितियाँ विपरीत हों, तो समझ लें कि ईश्वर आपकी परीक्षा ले रहे हैं ताकि आप और मजबूत बनकर उभरें।”
“अहंकार और लालच अज्ञानता के दो सबसे बड़े लक्षण हैं। विनम्रता ही ज्ञान का सच्चा प्रमाण है।”
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