लालची बेटा : प्रेरणादायक कहानी

एक बार एक गांव में कन्हैया नाम का एक भोलाभाला आदमी रहता था। कन्हैया का उसी गांव में एक छोटा सा घर था। घर में वह और उसकी पत्नी और एक छोटा सा बच्चा रहता था जो उसकी पत्नी को अभी अभी कुछ दिन पहले ही हुआ था। कन्हैया के पास जमीन तो खूब सारी थी पर वह सारी जमीन बंजर थी। उस जमीन पर कोई भी फसल नहीं हो पाती थी, जिस कारण वह अपना घर चलाने के लिए एक मुनीम जी के घर पर काम करता था। प्रेरणादायक कहानी

लालची बेटा : प्रेरणादायक कहानी

भाग्यवान वह भाग्यवान। आज मुझे मुनीम जी के पास बहुत सारा काम है। आज मुनीम जी का अनाज बाहर शहर बिकने को जाएगा तो मैं आज खाना खाने नहीं पाऊंगा तो तुम आज मेरा खाना। किसी के भी हाथ मुनीम जी के घर तक पहुंचा देना। फिर कन्हैया मुनीम जी के घर पर काम के लिए निकल जाता है। आज तो कोई नजर नहीं आ रहा जिसके हाथ में खाना पहुंचा सकूं। लगता है आज मुझे ही खाना देने जाना होगा।

कन्हैया की पत्नी कन्हैया को खाना देने के लिए मुनीम जी के घर के लिए निकल जाती है। मगर रास्ते में उसे सांप काट लेता है। अरे ये किसने काट लिया मुझे कांटा तो छुआ नहीं है, कितना दर्द हो रहा है। सांप काटते ही वह जमीन पर गिर जाती है और वहां पर खूब सारी भीड़ इकट्ठा हो जाती है। कन्हैया लाल अभी अभी गांव से एक खबर आ रही है कि तुम्हारी पत्नी को एक सांप ने काट लिया है तो मैं तुरंत ही उसके पास जाना होगा। कन्हैया चौक जाता है और कन्हैया वहां से तुरंत ही निकल जाता है। मगर कन्हैया की पत्नी नहीं बच पाई। प्रेरणादायक कहानी

सब खतम हो गया तो मुझे और अपने इस बच्चे को अकेला ही छोड़ गई। अब इस बच्चे को मैं कैसे पा लूंगा। इससे बढ़िया तो मैं भी मर जाता। अपनी पत्नी के गुजर जाने के दुख में कन्हैया खूब दुखी हो रहा था। कुछ सालों बाद कन्हैया के जीवन में खुशी का माहौल बनता है।

राजेश बेटा अब तक खूब बड़ा हो चुका था और उसकी बिजली विभाग में सरकारी नौकरी लग चुकी थी। आज बेटा तुझे लड़की वाले देखने आ रहे हैं। आइए आइए आपका स्वागत है मेरे छोटे से घर में। राजेश को लड़की वाले देखने के लिए आते हैं और राजेश का रिश्ता नंदिनी के साथ पक्का हो जाता है। फिर कन्हैया अपने बेटे की शादी बड़े ही धूमधाम से करता है। फिर शादी के कुछ दिन बाद। प्रेरणादायक कहानी

नंदिनी येलो पेज जरा अलमारी में रख लेना। अरे बाप रे इतने सारे पैसे। बेटा राजेश, तू इतने सारे पैसे कहां से लाया? तेरी तो इतनी कंघा भी नहीं है। अरे पिताजी, ये कंघा नहीं है। अब मैं तुम्हें कैसे समझाऊं? पिताजी इसे अंग्रेजी भाषा में कमीशन कहते हैं। मतलब तू लोगों से घूस लेने लगा है। और पिताजी! बेटा, तुझे तेरी मां के गुजर जाने के बाद भी मैंने तुझे पढ़ाया लिखाया और इतनी बढ़िया नौकरी के काबिल बनाया और आज तू उसी कुर्सी का फायदा उठाकर गरीब लोगों से घूस ले रहा है। प्रेरणादायक कहानी

तुम्हें क्या पता पिताजी? ईमानदारी के रास्ते पर चलने वाला हमेशा पीछे रह जाता है। आज कल जो ईमानदारी के रास्ते पर चलता है, वह हमेशा पीछे ही रह जाता है। ईमानदारी पर चलेंगे तो धीरे धीरे आगे बढ़ेंगे। अगर थोड़ी बहुत घूस खाकर आगे बढ़ेंगे तो बहुत जल्दी आगे बढ़ेंगे। पिताजी बेटा, जो ईमानदारी के रास्ते से धीरे धीरे आगे बढ़ता है, वह बहुत लंबे समय तक टिकता है।

लालची बेटा : प्रेरणादायक कहानी

जो यह घूस खाकर आगे बढ़ता है, वह बहुत ही जल्दी बर्बाद होता है। और आगे तेरी मर्जी। और कन्हैया इतना कहकर अपने घर से निकल जाता है। ठीक ही तो कह रहे हैं कि घूस लेना पाप है। पिताजी की बात तो मान लो। तुम भी चालू हो गई। पिताजी मुझे कम सुनाकर गए हैं। क्या गोद लेना पाप है? अब मुझे मेरा खाना दे दो। ऑफिस के लिए लेट हो रहा हूं। प्रेरणादायक कहानी

इसी तरह कन्हैया का बेटा राजेश लोगों से घूस लेने लगा था। मां। वह हर रोज ढेर सारे पैसे लाने लगा। पर कन्हैया को बिल्कुल भी पसंद नहीं था। अरे बेटा, यह मुझे नहीं है। पसंद तो मेरे लिए यह लोगों से घूस खाना बंद क्यों नहीं कर देता? अरे पिताजी, तुम तो मेरे हाथ धोकर पीछे ही पड़ गए। घूस घूस लगा रखा है। मैं घूस लेना बंद नहीं कर सकता। तुम्हें मेरे साथ रहना हो तो रहो वरना यहां से निकलो। तुम्हें जरा सी भी शर्म नहीं है। कोई भला अपने पिताजी से ऐसे बात करता है क्या? वह क्या गलत कह रहे हैं? ठीक ही तो कह रहे हैं कि घूस लेना पाप है।

कोई यह पाप नहीं है। आजकल सब ऐसे ही काम करते हैं और तुम ज्यादा मेरी अम्मा मत बनो। तुम्हें भी इस घर में रहना हो तो रहो, वरना तुम भी यहां से निकलो। अरे बेटा, मेरे कारण तुम दोनों आपस में मत लड़ो। मैं ही इस घर को छोड़कर चला जाता हूं। अरे पिताजी, इन्होंने तुम्हें गुस्से में आकर घर छोड़कर जाने को कह दिया है। आप तो सच में घर छोड़कर जाने को तैयार हो गए। तुम कहां पर रहोगे? बेटा, तू मेरे रहने की चिंता मत कर। मैं तो कहीं पर भी रह लूंगा। प्रेरणादायक कहानी

इतना कहकर कन्हैया घर छोड़कर चला जाता है। अरे, तुम कैसे बेटे हो जो अपने पिता को घर छोड़कर जाने के लिए एक बार भी नहीं रोका। कन्हैया अपना घर छोड़कर मुनीमजी के घर पर जाता है। वहां हुआ कन्हैया, आज तो तुम समय से पहले काम पर आ गए। और कन्हैया मुनीमजी को अपने बेटे की सारी बात बता देता है। अरे बाप रे! तुम्हारे बेटे ने तुम्हें घर से निकाल दिया। ये तो उसने बहुत गलत किया। कन्हैया तुम चिंता मत करो। आज से तुम मेरे साथ मेरी हवेली में रहोगे। नहीं मुनीमजी, मैं तो मेरे खेत में ही रह लूंगा। कन्हैया तुम वहां पर कैसे रह पाओगे।

मुनीमजी। मैं वहां आराम से रह लूंगा। तुम्हारा मुंह उतरा उतरा क्यों लग रहा है? आज ऑफिस में कुछ हुआ क्या? हां, आज मैं लोगों से घूस लेता पकड़ा गया और अब मुझे अपनी नौकरी से भी निकाल दिया गया है और मैंने जितना भी घूस का पैसा खाया है वो मुझे सरकार को वापस लौटाना होगा। प्रेरणादायक कहानी

मुझे बिल्कुल भी समझ नहीं आ रहा है अब मैं क्या करूंगा। कन्हैया अपने खेतों के बीच में एक झोपड़ी तैयार करता है और उसी झोपड़ी में रहने लग जाता है। मुनीम जी कन्हैया से मिलने उसकी झोपड़ी पर जाते हैं। अरे मुनीमजी, आज तुम्हारा ये मेरी झोपड़ी में कैसे आना हुआ? अरे कन्हैयालाल, तुम्हारे लिए एक खुशखबरी है। अरे जो तुम्हारी बंजर जमीन थी ना, वो एक फैक्ट्री निर्माण के काम के लिए खरीदी जा रही है। पूरे ₹5 लाख में। क्या ₹5 लाख मुनीमजी। मुझे तो आपकी बात पर विश्वास नहीं हो रहा।

अरे, मेरी बात पर भरोसा करो। मैं सच कह रहा हूं। ऊपर वाले ने मेरी सुन ली, कन्हैया अपने बंजर जमीन को बेचकर उसी गांव में जमीन के पैसे से एक बढ़िया सा घर बनवा लेता है और उधर सरकार द्वारा पैसे लेने के बावजूद सरकार उनका घर भी जप्त कर लेती है। जिस कारण राजेश और नंदिनी को घर खाली करके जाना पड़ा।

आज तुम्हारे लालच के चक्कर में पिताजी भी घर छोड़कर चले गए और आज हमें भी घर से बेघर होना पड़ा। तुम्हारे लालच के चक्कर में, और बेटा अब तो तुम्हारा पिता लखपति बन गया है। तुम यह खबर सुनकर आए हो। जानता हूं तुम तुम्हारे पिता के पास केवल पैसों की लालच में ही आए हो। तुमने आज तक तुम्हारी मां को देखा। यह कन्हैया ने तुम्हें तुम्हारी मां के जाने के बाद खूब पढ़ा लिखाकर बड़ा करा और तुमने उसे ही घर से निकाल दिया और तुमने उसी पिता को घर से निकाल दिया। तुम यह सब करते बिल्कुल भी शर्म नहीं आई। प्रेरणादायक कहानी

ऐसा कहकर मुनीमजी ने कन्हैया को समझाने का प्रयास किया, “कन्हैया, तू भले ही धनवान बन गया है, पर यह सब तेरे लालच के बजाय तेरी मां और पिताजी को खोने के लिए क्या मोल रहा है? तूने अपने आप को और अपने परिवार को बिना समझे ही खो दिया है।”

कन्हैया ने दुखभरे मन से उत्तर दिया, “मुनीमजी, मैंने तो यह सोचते हुए किया कि पैसा ही सबकुछ होता है, पर अब समझ आया कि सच्ची खुशियाँ और समृद्धि तो परिवार के साथ होती हैं।”

मुनीमजी ने कहा, “तू जो कुछ भी कर रहा है, वह सिर्फ अपने लालच के लिए है। जानता है, इस समय तेरे परिवार को तू बहुत ज्यादा जरुरत है। तू यह नहीं समझता कि लालच में ही सब कुछ नहीं होता।” प्रेरणादायक कहानी

कन्हैया ने गहराई से सोचा और अपनी गलती समझी। उसने मुनीमजी से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब अपने परिवार को पहचानेगा और उनके साथ हमेशा रहेगा।

मुनीमजी ने उसे साथीत्व का महत्व सिखाया और यह बताया कि धन की महत्वपूर्णता है, पर उसे सही तरीके से उपयोग करना भी आवश्यक है।

कन्हैया ने अपने परिवार से मिलकर अपनी गलतियों को सुधारने का निर्णय लिया और उनके साथ प्यार और समर्थन से जीने का संकल्प किया। उसने अपने परिवार के साथ साझेदारी और समृद्धि की दिशा में कदम बढ़ाने का निर्णय लिया।

इस घड़ी में, कन्हैया ने सच्चे धन की महत्वपूर्णता और परिवार के साथीत्व का महत्व सीखा और उसने अपने जीवन को सही मार्ग पर पहुंचाने का संकल्प किया।

मुनीमजी के साथ वार्ता करके, कन्हैया ने समझा कि धन की महत्वपूर्णता होती है, पर सच्ची खुशियाँ और समृद्धि परिवार के साथीत्व में होती हैं। उसने अपनी गलतियों को समझा और अपने परिवार के साथ प्यार और समर्थन से जीने का संकल्प किया। उसने सही मार्ग पर चलने का निर्णय लिया और अपने परिवार के साथ खुशहाल और संपन्न जीवन की दिशा में कदम बढ़ाया।

मुनीमजी के मार्गदर्शन से, कन्हैया ने अपने धन के सही उपयोग का निर्णय लिया और परिवार के साथ संबंधों की महत्वपूर्णता को समझा। इस अनुभव से, हमें यह सिखने को मिलता है कि धन के साथीत्व और परिवार के साथीत्व में खुशियाँ और समृद्धि का असली स्रोत है।

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